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गांव में बुखार से तड़पते बच्चों को बिना देखे लौटा स्वास्थ्य अमला

7 वर्ष पहले
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कस्बेके नजदीक गांव बालापुरा में स्वास्थ्य अमला बुखार से तड़पते बच्चों को बिना देखे ही लौट गया। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके बच्चों को देखने की बजाय स्वास्थ्य अमले ने सिर्फ औपचारिकता की।

दरअसल धीरोली स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र पर पदस्थ एमपी डब्ल्यू गंगासिंह एवं एएनएम अरूणा नागर गत मंगलवार को बालापुरा गांव में टीकाकरण के लिए पहुुंचे थे। एक स्थान पर बैठकर अमले ने कुछ बच्चों के स्वास्थ्य की जांच भी की। लेकिन ज्यादातर बच्चे बिना इलाज के ही छोड़ दिए गए। स्थानीय निवासी सियाराम गुर्जर ने बताया कि उसके 15 साल के बच्चे मोहर सिंह को तेज बुखार था और वह तप रहा था। लेकिन फिर भी स्वास्थ्य कर्मियों ने उसका परीक्षण नहीं किया और खून जांच के लिए स्लाइड भी नहीं बनाई। इसी प्रकार घनश्याम गुर्जर के सात साल के बच्चे बलवान को भी अपने हाल पर छोड़ दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्यकर्मी कई माह बाद गांव आए थे। लेकिन इस बार भी उन्होंने औपचारिकता पूरी की। ग्रामीणों ने बताया कि धीरोली स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र बंद रहता है और उस पर पदस्थ स्वास्थ्यकर्मी श्योपुर में निवास करते हैं। मजबूरी में आज उन्हें अपने बुखार से पीडि़त बच्चों को दिखाने के लिए मानपुर आना पड़ा। उधर एमपी डब्ल्यू गंगासिंह का कहना है कि उन्होंने बालापुरा गांव में पहुंचकर दो दर्जन बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण एक स्थान पर बैठकर किया था। कई ग्रामीण बच्चे हमारे पास ला नहीं रहे थे और घर पर जाकर स्वास्थ्य चेकअप कराने की बात कह रहे थे।