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कीचड़ भरा स्कूल का रास्ता, बजट के बावजूद ग्राम पंचायत नहीं दे रही ध्यान

7 वर्ष पहले
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नारायणपुरा-बमोरी मार्ग खस्ताहाल होने से परेशानी भुगत रहे आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण।

भास्करसंवाददाता|श्योपुर

सर्दीमें गांवों में बारिश जैसे हालात बने हुए हैं। अभी भी रास्ते कीचड़ से भरे पड़े हैं। जिससे ग्रामीणों का निकलना दूभर हो रहा है। स्कूली बच्चों को भी कीचड़ से होकर निकलना पड़ता है। लेकिन ग्राम पंचायतों का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। जबकि मूलभूत सुविधाओं के लिए पंचायतों को विभिन्न मदों में हर साल लाखों रुपए बजट मिलता है।

बड़ौदा क्षेत्र में तीन किलोमीटर लंबा नारायणपुरा-बमोरी मार्ग खस्ताहाल है। कई सालों से सड़क मार्ग का तो मेंटेनेंस किया गया है और ही ही जल निकासी का इंतजाम।। यही कारण है कि इस मार्ग से जुड़े आधा दर्जन गांवों के लोग जानलेवा गड्ढ़ों के बीच तो सफर करते हैं। साथ ही राहगीरों को तो बीच सड़क से ही गुजरना पड़ता है। स्कूली बच्चे भी खासे परेशान हैं, उन्हें बीच कीचड़ से ही गुजरकर स्कूल का सफर तय करना पड़ रहा है। पांडोला से नारायणपुरा-बमोरी मार्ग शुरू होता है।

स्कूली बच्चों को भी कीचड़ से गुजरकर जाना पड़ता है स्कूल

नारायणपुरागांव में मिडिल स्कूल संचालित है। गांव से बाहर होने के कारण बच्चों को स्कूल तक पहुंचने में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। तकरीबन डेढ़़ सौ बच्चे कीचड़ में होकर ही गुजरते हैं और स्कूल घर का सफर तय करते हैं। स्कूल प्रबंधन भी प्रशासन को जर्जर रास्ते की मरम्मत और जल निकासी का इंतजाम कराने के लिए प्रशासन को कई दफा पत्र लिख चुका है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है।

नारायणपुरा गांव में कीचड़ भरे रास्ते से निकलते स्कूली बच्चे।