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राजस्थान से नहीं मिल रहा पर्याप्त पानी, सिंचाई का संकट

6 वर्ष पहले
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प्रमुख सचिव को पूरे हालात से कराया अवगत

शासनको जल संसाधन विभाग ने अपनी रिपोर्ट और यहां उत्पन्न पानी की समस्या से अवगत करा दिया है। जल संसाधन विभाग के अधीक्षण यंत्री एनपी कोरी ने बताया कि मध्यप्रदेश को उसके हिस्से का पानी नहीं मिलने और अधिकारिक स्तर पर वार्ता का कोई हल नहीं निकलता देख विभाग के प्रमुख सचिव को पूरे हालात से अवगत करा दिया गया है।

गेहूं-धनिया को चाहिए पानी

जिलेभरमें रबी फसल की डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी की गई है। इनमें 50 हेक्टेयर में गेहूं और 65 हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बोवनी हुई है। सरसों की फसल को तो अब सिंचाई के लिए पानी की जरूरत नहीं है। लेकिन गेहूं को तो अभी एक पानी हर हाल में चाहिए। इसके 20 दिन बाद भी पानी की जरूरत पड़ेगी। धनिया की फसल को भी सिंचाई की जरूरत है।

चंबल नहर में लगातार कम हो रहा पानी का स्तर।

मप्र-राजस्थान के पानी बंटवार के विवाद में किसान परेशान

भास्करसंवाददाता|श्योपुर

राजस्थानके कोटा बैराज से चंबल नहर में निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ने को लेकर दोनों राज्यों में विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। राजस्थान के साथ मध्यप्रदेश के सिंचाई महकमे का चंबल नहर में 3900 क्यूसेक (क्यूबिक फीट प्रति सेकेण्ड) पानी छोड़ने का करार हुआ था। लेकिन अब राजस्थान का सिंचाई महकमा चंबल नहर में सिर्फ 2500 क्यूसेक के आसपास ही पानी की सप्लाई कर रहा है। मध्यप्रदेश को अपने हिस्से का पानी नहीं मिलने से चिंतित अफसर राजस्थान के अफसरों से कई बार मुलाकात भी कर आए हैं, लेकिन चंबल नहर में पानी की मात्रा नहीं बढ़ रही है। नहर में पानी की बढ़ोतरी नहीं होने से किसानों के सामने फसलों की सिंचाई का संकट है। किसानों का कहना है कि अगर उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिला तो फसलें सूख जाएंगी।

प्रमुखसचिव को भेजी रिपोर्ट

^चंबलनहर में महज 2500 से 2700 क्यूसेक के बीच पानी मिलने पर हम लगातार कोटा सिंचाई महकमे के अफसरों से पानी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। अब किसानों की मांग के हिसाब से चंबल नहर में पानी की मात्रा बढ़ाना आवश्यक है। हमने सारी स्थिति की राज्य शासन और विभाग के प्रमुख सचिव को रिपोर्ट भेज दी है। सीएमशुक्ला, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग, श्योपुर