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जैदा में फैला कुपोषण, बालक को एनआरसी भेजा, बालिका के लिए परिजन ने नहीं दी रजामंदी
गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दो कुपोषित बच्चे किए चिन्हित।
भास्करसंवाददाता| श्योपुर
जिलामुख्यालय से दो किमी दूर जैदा गांव की आदिवासी बस्ती में कुपोषण ने दस्तक दी है। यहां दो कुपोषित बच्चे चिन्हित किए गए हैं। इनमें एक बालक को जिला अस्पताल की एनआरसी में दाखिल करा दिया गया है। जबकि बालिका गांव में ही कुपोषण से जंग लड़ रही है। बालिका को उसके घरवालों ने एनआरसी भेजने से मना कर दिया।
जैदा गांव की सहरिया बस्ती का बीते रोज गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संतोष गौड़ ने दौरा किया। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को बस्ती में दो कुपोषित बच्चे मिले। सुनील पुत्र गंगाराम आदिवासी 3 वर्ष कई दिन से कुपोषण की गिरफ्त में था। अत्यंत कमजोर इस बच्चे को पोषण पुनर्वास केन्द्र में दाखिल कराने के लिए परिजन को सलाह दी गई। परिजन की रजामंदी पर उसे तत्काल जिला अस्पताल की एनआरसी में भेजा गया है। इसी बस्ती में शकीना पुत्री रामलखन आदिवासी 17 माह को भी कुपोषण के लक्षण मिले हैं। शकीना को एनआरसी में भेजने के लिए परिजन को सलाह दी गई। लेकिन परिजन ने उसे भर्ती कराने से इंकार कर दिया। यही वजह है कि यह कुपोषित बालिका गांव में ही कुपोषण से जंग लड़ रही है। इस संबंध में एकीकृत बाल विकास सेवा अधिकारी कल्पना बौहरे ने बताया कि गांव में अगर कुपोषण फैला है और परिजन बच्चों को एनआरसी में भर्ती नहीं करा रहे हैं तो गंभीर विषय है। इस सिलसिले में वे जरूरी कदम उठाएंगी।