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गांधी की त्रयोदशी पर लोगों ने त्रिवेणी संगम के विकास पर जताई चिंता

6 वर्ष पहले
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राजस्थान ने जमकर विकास किया

सांसद ने किया है 30 लाख देने का वादा..

यहां चंबल, बनास और सीप का मिलन...

देशके चुनिंदा पवित्र धार्मिक स्थलों में शुमार श्योपुर जिले में चंबल तटपर रामेश्वर धाम स्थित त्रिवेणी संगम में 67 साल पहले 12 फरवरी 1948 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और फिर गांधीवादी जयप्रकाश नारायण की भस्म (अस्थियों की राख) को हेलिकॉप्टर से प्रवाहित किया गया था, लेकिन 67 साल में तो इस स्थल पर घाट बनाया जा सका है और इसे पर्यटन केंद्र का ही दर्जा मिल सका है।

गुरुवार को स्व. महात्मा गांधी की त्रयोदशी पर एक बार फिर गांधीवादी लोगों ने सैकड़ों की तादाद में एकत्रित होकर 67 साल पहले जिले के प्रथम विधायक गांधीवादी ठा. उदयभानु सिंह चौहान के हाथों शुरू हुई परंपरा के तहत यहां सर्वधर्म प्रार्थना सभा की। संगम किनारे बापू के पसंदीदा भजन बैष्णव जन तेरे रघुपतिराघव राजा राम..भी गूंजे। इस मौके पर आयोजित सद्भावना सम्मेलन में विधायक दुर्गालाल विजय ने वक्ताओं की चिंताओं पर मरहम लगाने के लिए कहा कि सांसद अनूप मिश्रा ने इस स्थान के विकास के लिए 30 लाख देने का ऐलान किया है। मैं इस बात की कोशिश करूंगा कि यहां हर हाल में विकास हो। लेकिन यह भी किसी से छिपा नहीं है कि इस स्थान के विकास में घड़ियाल (चंबल सेंक्चुरी) प्रोजेक्ट वाले अफसर अड़ंगा लगाते आए हैं। विधायक श्री विजय ने कहा कि सांसद अनूप मिश्रा ने दिल्ली से इस स्थान के विकास के लिए घड़ियाल प्रोजेक्ट से मंजूरी दिलाने की बात कही है।

प्रार्थना की, संकल्प कराए और सुने पसंदीदा भजन..

संगमतट पर गुरुवार को नजारा बदला हुआ था। रेत मिट्टी के किनारे सद्भावना सम्मेलन सजा था। गांधी विचार मंच के अध्यक्ष पूर्व विधायक सत्यभानु सिंह चौहान, सचिव कैलाश पाराशर, गांधी सेवाश्रम के प्रबंधक जयसिंह जादौन ने यहां हजारों गांधीवादियों को जोड़ा। इस मौके पर अतिथि बने विधायक दुर्गालाल विजय, जिला पंचायत अध्यक्ष गुड्डीबाई आदिवासी, श्योपुर नपाध्यक्ष दौलतराम गुप्ता, पूर्व विधायक बाबूलाल मेवरा ने गांधीजी को श्रृद्धांजलि दी। गांधीवादियों ने सर्वधर्म प्रार्थना की। अहिंसा एवं जिले के विकास के लिए जुड़ जाने का संकल्प दिलाया और गांधीजी के पसंदीदा भजन भी सुने।

रामेश्वर धाम पर मप्र-राजस्थान की सीमा मिलती है। चंबल नदी के दोनों ओर यह राज्य हैं। राजस्थान की सीमा में चंबल किनारे भगवान चतुर्भुजजी के मंदिर के आसपास राजस्थान सरकार ने विकास किया है। लंबा- चौड़ा घाट बनाया गया है। कई समाजों की धर्मशालाओं के लिए सरकार ने स्थान दिया है। लेकिन मप्र ने अपने हिस्से में 67 साल में एक पत्थर भी नहीं रखा। घाट बनाया और ही सड़क।

रामेश्वर धाम पर घाट निर्माण एवं पर्यटन स्थल के तौर पर इसे विकसित करने के लिए करीब 10 साल से पहल तो हो रही है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की रुचि नहीं होने से यह काम नहीं हो पा रहा है। पांच साल पहले जिपं ने बीआरजीएफ योजना से 35 लाख इस स्थल के विकास को देने का प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन घड़ियाल सेंक्चुरी ने इसे मंजूरी नहीं दी और पैसा लेप्स हो गया। हाल में सांसद अनूप मिश्रा ने कार्तिक मेले में यह ऐलान किया था कि रामेश्वर धाम के विकास के लिए वे सांसद निधि से 30 लाख रुपए देंगे।

1 रामेश्वर धाम पर चंबल किनारे त्रिवेणी संगम है। यहां तीन नदियों चंबल, बनास और सीप का मिलन होता है।

2 12 फरवरी 1948 को महात्मा गांधी की भस्म को संगम के जल में हवाई जहाज से फेंककर प्रवाहित किया गया था।

3 सन् 1981 में गांधीवादी जयप्रकाश नारायण की भस्म भी रामेश्वर धाम स्थित त्रिवेणी संगम में प्रवाहित की गईं।

4 चंबल नदी में घड़ियाल, मगरमच्छ एवं प्रवासी पक्षियों का बसेरा होने से सैलानियों के लिए भी यह स्थल आकर्षण का केंद्र है।

5 कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों की तादाद में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के लिए एकत्रित होते हैं।

6 सोमवती अमावस पर हजारों श्रृद्धालु इस पवित्र स्थल पर एकत्रित होकर डुबकी लगाते हैं।

7 मप्र-राजस्थान के मध्य स्थित इस स्थल पर स्टेट कालीन भगवान चतुर्भुज का मंदिर है। चंबल के दोनों पार मंदिर होने से यह स्थल ऐतिहासिक है।

रामेश्वर धाम त्रिवेणी संगम के किनारे महात्मा गांधी की त्रयोदशी पर जुटे बापू के अनुयायी।