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सब्जी के रूप में बिकता है जंगली फल, कीमत Rs.160 किलो

4 वर्ष पहले
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पहली बारिश के कुछ ही दिनों बाद जंगलों के साथ खेतों की मेढ़ पर कंटीली झाड़ियों में फैलने वाली बेल पर एक मुलायम कांटेदार फल नजर आने लगता है। इसे ककोरा कहते हैं। हर खास और आम इसकी सब्जी बना कर बड़े चाव के साथ खाते हैं। वर्तमान में यह सबसे महंगे दामों में 160 रुपए किलो बिक रहा है। पहले दिन यह दो सौ रुपए किलो बिका। जानकर हैरानी होगी कि शासन की सूची में न तो यह सब्जी के रूप में दर्ज है और न ही कोई किसान इसकी पैदावार करता है।

सब्जी मंडी में ककोरा ने अपनी आवक दर्ज करा दी है। लोग चाव के साथ इसे खरीद भी रहे हैं। इसको खाने वाले कम लोग ही जानते होंगे कि इसकी कोई विधिवत पैदावार नहीं होती। न तो बाजार में इसके बीज मिलते है और न ही कोई किसान इसकी फसल करता है । शासन के उद्यानिकी विभाग में यह सब्जियों के रूप में दर्ज नहीं है।

हरी मटर को दे रहा टक्कर: सब्जी मंडी में हरी मटर ने भी आवक दर्ज करा दी है। मटर का सीजन न होने के कारण यह भी 2 सौ से 160 रुपए किलो के भाव पर बेची जा रही हैं। बारिश के कारण पैदावार प्रभावित होने से हरी धनिया टमाटर भी अपने शौकीनों की जेब ढीली कर रहे हैं। हरी धनिया 100 रुपए किलो तो टमाटर 80 रुपए किलो बिक रहा है।

ककोरा जंगली फल, बाजार में नहीं मिलते बीज
ककोरा के बीज नहीं मिलते। न ही कोई किसान इसकी पैदावार करता हैं। आज तक इसके बीज कलेक्ट करने का भी प्रयास नहीं किया गया। यह जंगली फल हैं जो कि पहली बरसात से ही उगना शुरू हो जाते है।

जंगलों और खेतों की मेढ़ पर ही होता है पैदा
आमतौर पर ककोरा जंगलों के साथ खेत की मेढ़ों पर पहली बारिश होने के साथ ही पैदा होने लगता हैं। यह कहां और किसके खेत में पैदा होगा, यह नहीं कहा जा सकता। यह पूरी तरह से जंगली फल है। जंगलों में भी जहां झाड़ियां अधिक होते ही वहां यह आसानी के साथ पैदा हो जाता है। इसकी एक विशेषता और है, जितनी अच्छी बारिश होगी, ककोरा की पैदावार भी उतनी ही अच्छी होगी।

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