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मनरेगा की मजदूरी बांटने मांगे थे 4.5 करोड़, मिले मात्र दो करोड़

7 वर्ष पहले
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मजदूरी का भुगतान लटकने से 9 हजार से ज्यादा काम प्रभावित।

भास्करसंवाददाता| शिवपुरी

महात्मागांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में मांग के अनुरूप बजट राशि आने के बाद इस योजना से जुड़े काम ठप पड़े हैं। बीते कई महीने से राशि आने से निर्माण कार्य प्रभावित हैं। मनरेगा के तहत 4.5 करोड़ रुपए मजदूरों को भुगतान करने के लिए राशि की आवश्यकता है। इसके लिए मांगपत्र भी शासन को भेजा गया था लेकिन मात्र दो करोड़ रुपए का बजट जिला मुख्यालय को प्राप्त हुआ है। इतनी कम राशि मिलने से इस योजना के संचालन पर सवाल खड़े हो गए हैं। राशि होने से सैकड़ों मजदूरों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। रोजगार गारंटी वाले इस कानून के तहत 15 दिन के भीतर मजदूरों को भुगतान अनिवार्य है लेकिन राशि के अभाव में कई काम स्वीकृत होने के बाद भी चालू नहीं हो पा रहे हैं। केंद्र राज्य सरकार के बीच बजट आवंटन को लेकर एक राय बनने के कारण ऐसी स्थिति निर्मित हुई है।

9हजार से ज्यादा काम प्रभावित :मनरेगा के तहत जिले में इस समय विभिन्न ग्राम पंचायतों में रोजगार गारंटी योजना के तहत 9 हजार से ज्यादा काम संचालित हैं। मनरेगा के तहत जिले के लिए अधिकारियों ने 12 करोड़ रुपए की राशि मांगी थी लेकिन मात्र दो करोड़ रुपए का बजट ही दिया गया है। राशि प्राप्त होने से सारे काम प्रभावित हैं। योजना के लिए बजट मिलने से जो काम पूर्व से संचालित थे वह अधूरे पड़े हैं। बजट के अभाव में नए कार्य भी स्वीकृत नहीं हो रहे हैं।

जिलेमें पलायन की स्थिति :मनरेगा के तहत बजट आने से मजदूरों को काम मिलने के बाद आदिवासी बाहुल्य गांव में पलायन की स्थिति है। जिले की 603 पंचायतों में अधिकतर में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन से स्थानीय स्तर पर ही काम चलने से मजदूरों को रोजगार के कुछ साधन मिल रहे थे लेकिन अब बजट होने से भुगतान लटका है। इससे दूसरे प्रदेशों में मजदूर पलायन को मजबूर हैं।

कर्मचारियोंको वेतन तक के लाले पड़े :मनरेगा के तहत जिला पंचायत में जिन कर्मचारियों को संविदा आधार पर रखा गया था उनके सामने संकट के बादल हैं। बजट राशि आने के चलते इन्हें कई माह से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा इनकी संविदा अवधि भी अभी तक नहीं बढ़ाई गई है। यह कर्मचारी बजट की आशा में हैं। अधिकारी भी इस बारे में कुछ नहीं बता पा रहे हैं। कारण यह है कि केन्द्र और राज्य के ब