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सोयाबीन आधारित अंतरवर्तीय फसल पद्धति अपनाएं किसान

4 वर्ष पहले
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खरीफ मौसम में बारिश अभी तक पिछले वर्ष की तुलना में कम हुई है। किसान,मानसून की अनिश्चितता के जोखिम से बचने के लिए सोयाबीन आधारित अंतरवर्तीय फसल पद्धति अपनाएं।

उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने बताया कि सोयाबीन आधारित अंतरवर्ती फसल पद्धति में अरहर की दो कतारें तथा सोयाबीन की चार कतारें ;2:4,अरहर की दो कतारें तथा सोयाबीन की दो कतारें 2:2,मक्का की दो कतारें तथा सोयाबीन की दो कतारें 2:2अरहर की दो कतारें तथा उड़द की चार कतारें 2:4 अरहर की दो कतारें तथा मूंग की चार कतारें;2:4अरहर की दो कतारें तथा तिल की चार कतारें 2:4 के हिसाब से बुवाई करें। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि खरीफ फसलों में कम अवधि की सोयाबीन किस्में,उड़द किस्में,बाजारा व मक्का की संकर किस्मों का उपयोग करें और किसान भाई बीज दर 15 प्रतिशत बढ़ाकर उपयोग करें। जिन किसान भाईयों ने बोनी कार्य पूर्ण कर लिया है वह निंदाई गुड़ाई कर खरपतवार निकाले। सूखे की स्थिति में मूंगफली सोयाबीन व अन्य खरीफ फसलों में उपलब्ध जल से जीवन रक्षक सिंचाई अवश्य कराएं जमीन से वाष्पीकरण रोकने हेतु डोराध्कोल्पा का प्रयोग करें।

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