पुलिस की ही ढील से 65 दिन में 90 हजारी बन गया गड़रिया गैंग
खेत में छिपी थी चंदा, एडी एक्सपर्ट के पैरों में हथियार रखकर किया समर्पण
भास्कर संवाददाता|शिवपुरी
65 दिन में ही 90 हजार का इनामी बना चंदन गड़रिया गैंग का पुलिस ने भले ही खात्मा कर दिया हो। लेकिन एक सच यह भी है कि इस गैंग का दो महीने पहले तक कोई अस्तित्व नहीं था। पुलिस की ढील के चलते यह गैंग पनपा। हालांकि पुलिस ने ही बाद में इस गैंग का खात्मा कर दिया। इधर चंदा के साथ पुलिस एनकाउंटर के पीछे की कहानी भी गले नहीं उतर रही। खबर तो यह है कि प्रेमी चंदन की मौत के बाद चंदा भटक रही थी। सरसों के खेत में छिपी बैठी चंदा ने मध्यस्थ के जरिए एडी एक्सपर्ट के सामने सरेंडर किया और उसे सैल्यूट कर हथियार उसके पैरों में डाल दिए।
मध्यस्थता से हुआ सरेंडर
सूत्रों का कहना है कि चंदन गड़रिया के एनकांउटर के बाद चंदा और भोजा गड़रिया आमोला के जंगल में पहुंचे। वहां एक मंदिर के पुजारी को मध्यस्थ बनाकर चंदा ने पुलिस से सरेंडर करने की पेशकश कराई थी। लेकिन संदेह होने पर वह खिसक गई। इसके बाद अपने रिश्तेदार के माध्यम से चंदा ने मड़ीखेड़ा डैम के सामने ग्रामीण इलाके में एडी टीम के एक्सपर्ट ब्रजमोहन रावत के सामने सरेंडर कर दिया।
पर्दे में रखने के होते हैं निर्देश
पुलिस ने डकैतों की मीडिया से इसलिए बात नही कराई क्योंकि इस तरह के मामलों में मुलजिम को पर्दें में रखने के निर्देश दिए जाते है। मो. यूसुफ कुर्रेशी, एसपी शिवपुरी
पुलिस ने गैंग पर ऐसे बनाया दबाव
22 दिसंबर को सीताराम की पकड़ छूटने के बाद पुलिस ने रामनिवास एवं भक्खू पाल को रसद पहुंचाने के नाम पर गिरफ्तार कर लिया। ये दोनों डकैत चंदन के भाई और पिता थे।
12 जनवरी को जंगल में पुलिस ने गड़रिया गैंग से दस-दस हजार के तीन इनामी डकैत कल्लू पुत्र धनीराम पाल, मोहन पुत्र अमान सिंह और बलवीर पुत्र परसू राम पाल को दबोच लिया। पुलिस ने यहां भी मुठभेड़ बताई। मुलजिम बापर्दा रखे और किसी को इनसे बात नहीं करने दी।
30 जनवरी को पुलिस ने डकैत चंदन गड़रिया को इनकाउंटर में ढेर कर दिया।
इसके बाद पुलिस ने 11 फरवरी की रात डकैत चंदा गड़रिया और गैंग का बचा एक मात्र सदस्य भोजा गड़रिया को दबोचने का दावा किया है।
चार संदेह, जो पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
1 कोलारस में चरवाहे के अपरहण से पहले डकैत चंदन गड़रिया को जिले में कोई नहीं जनता था। और उसपर एक भी अपराध पंजीबद्ध नहीं था।
2 पुलिस ने गैंग के प्रत्येक सदस्य पर दस- दस हजार का इनाम घोषित किया और इसके बाद देखते ही देखते 65 दिनों में गैंग 90 हजारी हो गया। इस गैंग ने एकमात्र वारदात 8 दिसंबर को चरवाहे का अपहरण किया ।
3 पुलिस ने गैंग के बढ़ने के साथ- साथ हर 15 दिन के भीतर नए-नए साथी गैंग का सदस्य बताकर पेश किए लेकिन किसी भी सदस्य से प्रेस की बात नहीं कराई।
4 डकैत चंदा गड़रिया के पकड़े जाने के बाद भी पुलिस ने उससे बात नहीं करने दी। जबकि चंदा और भोजा ही गैंग के सक्रिय सदस्यों में से एक है। वही चंदन गड़रिया एनकाउंटर के राज से पर्दा उठा सकते थे।