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प्रदेश में टैक्स बढ़ने के बाद डीजल की खपत गिरना जारी

6 वर्ष पहले
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पेट्रोल-डीजलपर चार फीसदी वैट बढ़ाने के बाद से प्रदेश में डीजल की खपत गिरना जारी है। तेल कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार इस साल जनवरी में जनवरी 2014 की तुलना में डीजल की खपत करीब 10 फीसदी कम हो गई। इससे सरकार को 10 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो गया।

सीमावर्ती जिलों में तो हैरानी वाले आंकड़े सामने आए हैं। टैक्स बढ़ने से पहले एक माह में (19 नवंबर से 19 दिसंबर 2014 तक) डीजल की जो खपत थी, वह टैक्स बढ़ने के बाद (20 दिसंबर से 20 जनवरी 2015) 50 फीसदी तक गिर गई। हालत यह है कि पड़ोसी राज्यों के पेट्रोल पंपों पर मप्र से सस्ता पेट्रोल-डीजल बेचने के बोर्ड भी लग गए हैं। इंदौर जिले की ही बात करें तो डीजल की खपत में करीब 15 फीसदी की गिरावट गई है। इस महीने विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने जा रहा है। ऐसे में सरकार पेट्रोल-डीजल से आय बढ़ाने के लिए फॉर्मूला लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

प्रमुख सीमावर्ती जिलों में डीजल की खपत में कमी के आंकड़े

जिला दिसंबर जनवरी फीसदी

इंदौर300 260 13.30

बड़वानी 550 450 18

बैतूल 1500 1050 30

भिंड 530 450 15

छतरपुर 700 500 28

छिंदवाड़ा 300 270 10

धार 800 630 21

रतलाम 200 150 25

शिवपुरी 1800 850 53

(आंकड़े 20 नवंबर से 19 दिसंबर 2014 तक और राज्य सरकार द्वारा टैक्स बढ़ने के बाद 20 दिसंबर से 20 जनवरी 2015 तक के।)

नागपुर से 40 किमी दूर छिंदवाड़ा रोड पर सावनेर में पेट्रोल पंप पर लगा बोर्ड।

प्रदेश के करीब 15 सीमावर्ती जिलों में दिसंबर-14 में 11500 किली लीटर डीजल बिका था जो जनवरी-15 में 34 फिसदी गिरकर 7685 रह गया।

^सरकार ने अगर पड़ौसी राज्यों की तुलना में टैक्स बराबर नहीं किया तो यह गिरावट जारी रहेगी। -हिमेशकंपानी, सीनियर मैनेजर, एस्सार ऑयल लि.

प्रति लीटर राशि तय हो तेल पर

^अबशासन को प्रति लीटर तय राशि रखने पर गंभीरता से सोचना चाहिए। -आर.एस.गोयल, तेल कंपनियों के कर सलाहकार