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अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हिंदी भाषा : शुक्ल

7 वर्ष पहले
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शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत लगा स्वास्थ्य शिविर।

भास्करसंवाददाता| शिवपुरी

आधुनिकताके इस युग में हिंदी भाषा को अपने अस्तित्व के लिए लड़ना पड़ रहा है। कारण, ऋषि मुनियों के आश्रम के बाद अब स्कूलों में अधिकांश: अंग्रेजी शिक्षा पर जोर दिया जाता है। यही बजह है कि हिंदी भाषी बच्चों में हिंदी के प्रति लगाव कम और अंग्रेजी की ओर अधिक झुकाव देखने को मिलता है। लेकिन इस देश में अनादिकाल से हिंदी भाषा का अस्तित्व कायम रहा है, जो निरंतर आगे भी जारी रहेगा। यह बात प्रसिद्ध भाषाविद् डॉ. परशुराम शुक्ल विरही ने मंगलवार को लायंस लायनेस क्लब शिवपुरी सेन्ट्रल द्वारा आयोजित हिन्दी दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि हिंदी एक सरल सहज स्वभाव की भाषा है। इसलिए हरेक आमजन को अपनी भाषा के प्रयोग में हिंदी का उच्चारण अवश्य करना चाहिए। देश में हिंदी को राष्ट्रीय भाषा घोषित करने पर भी मंथन जारी है। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं कवि साहित्यकार डॉ. एचपी जैन ने हिंदी के प्रयोग पर बल देते हुए कविता पाठ किया और हिंदी संस्कृत भाषा की प्रामाणिकता सार्थकता पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम में लायंस क्लब सेन्ट्रल अध्यक्ष राजीव भाटिया, सचिव अशोक रन्गढ़ भी मंचासीन रहे। कार्यक्रम में इंजी.ओपी गोयल ने भी अपने संबोधन में हिंदी शब्दावली की सटीकता पर प्रकाश डालते हुए हिंदी भाषा का अधिक से अधिक इस्तेमाल किए जाने का आग्रह किया।