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सहरिया बोले: सरकारी जमीन हमारी है, कलेक्टर ने कहा: कुप्रथा दूर करो
आदिवासियों ने 365 दिन मांगा रोजगार
कलेक्टर की बात सुन एनजीओ पदाधिकारी बगलें झांकने लगे।
भास्करसंवाददाता| शिवपुरी
मानवअधिकार दिवस पर राष्ट्रीय सहरिया जन अधिकार संघर्ष मोर्चा के बैनर तले लगभग पांच सौ सहरिया आदिवासी महिला-पुरुषों ने मंगलवार को रैली निकालकर कलेक्टोरेट पर नारे लगाए कि सरकारी जमीन हमारी है। ज्ञापन लेने के बाद कलेक्टर राजीव दुबे ने आदिवासियों को लेकर आए एनजीओ पदाधिकारियों से कहा कि ज्ञापन की मांगों पर तो विचार किया जाएगा, लेकिन पहले आप लोग इनमें चल रही कुप्रथाओं को बंद करवाएं। कुछ दिन पहले ही एक बच्ची को दागने का मामला सामने चुका है। कलेक्टर की बात सुनकर एनजीओ पदाधिकारी बगलें झांकने लगे।
दोपहर लगभग तीन बजे हाथों में तख्ती-बैनर लेकर आदिवासी-महिला पुरुष कतारबद्ध होकर कलेक्टोरेट पहुंचे। यहां उन्होंने नारे लगाए कि हम अपना अधिकार मांगते-नहीं किसी से भीख मांगते, सरकारी जमीन हमारी है। सहरिया आदिवासियों को लेकर आए एनजीओ पदाधिकारियों ने ज्ञापन देने के लिए जिलाधीश को बुलाने के लिए मैसेज भेजा तो कुछ देर बाद एसडीएम जब ज्ञापन लेने आए तो एनजीओ संचालकों ने उन्हें ज्ञापन देने से मना कर दिया। कलेक्टोरेट में चल रही बैठक को निपटाने के लगभग एक घंटा बाद कलेक्टर बाहर आए और ज्ञापन लिया। ज्ञापन देखने के बाद जिलाधीश श्री दुबे बोले कि इसमें लिखी मांगों को तो पूरा करने का प्रयास करेंगे, लेकिन आप लोग इन्हें जागरूक करें ताकि अभी तक इनमें व्याप्त कुप्रथाएं दूर हो सकें। शासन ने स्वास्थ्य के लिए अस्पताल, पोषण आहार के लिए आंगनबाड़ी केंद्र सहित अन्य कई योजनाएं संचालित की हैं। जिनका लाभ इन्हें दिलाया जाए।
{ न्यूनतम मजदूरी 300 रुपए प्रतिदिन हो।
{ आदिवासियों की जमीन पर काबिज दबंगों को हटाया जाए।
{ भूमिहीन परिवारों को मिले पट्टों को अमल में लाकर जमीन दिलाई जाए।
{ वन अधिकार कानून के तहत अधिकार पत्र दिलाए जाएं।
{ मनरेगा में 365 दिन का रोजगार दिया जाए। व्यक्तिगत जॉबकार्ड बनाए जाएं।
{ प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज की जगह 10 किलो किया जाए। साथ में दाल खाद्य तेल भी दिया जाए।
{ पेंशन कम से कम 2 हजार रुपए प्रतिमाह की जाए।
शिवपुरी| अपनी मांगों के समर्थन में कलेक्टोरेट पहुंचे आदिवासयों को समझाइश देते कलेक्टर राजीवचंद्र दुबे।