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उपयंत्री ने लगाया अफसरों पर प्रताड़ना का आरोप

7 वर्ष पहले
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भास्करसंवाददाता| शिवपुरी

जबमेरे पिता की मृत्यु हुई तो मैं अपने घर से 700 किमी दूर पदस्थ होने की वजह से उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। दो साल पूर्व ही शासन ने मेरा ट्रांसफर गृह जिला ग्वालियर के नजदीक शिवपुरी में किया, लेकिन अब वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछोर भेज दिया। परेशान उपयंत्री ने जब स्थानांतरण निरस्त करने के लिए आवेदन दिया तो दो माह से वेतन ही रोक दिया। यह सब बताते-बताते मानसिक आर्थिक रूप से परेशान उपयंत्री एनएन निमोरिया की आंखों में आंसू गए।

जल संसाधन के चीफ इंजीनियर एनपी कोरी ने उपयंत्री निमोरिया का उप संभाग क्रमांक-दो शिवपुरी से जल संसाधन सर्वेक्षण उप संभाग पिछोर ट्रांसफर किया तथा 30 सितंबर को उन्हें रिलीव भी कर दिया। जबकि उपयंत्री निमोरिया को नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण खरगोन से 23 जुलाई 2012 को प्रमुख अभियंता भोपाल ने उप संभाग शिवपुरी ट्रांसफर किया था। महज दो साल के अंदर ही निमोरिया को पुन: पिछोर भेज दिया गया, जबकि शिवपुरी ऑफिस में कई ऐसे उपयंत्री हैं, जो 15 वर्षों से एक ही जगह कार्यरत हैं। नियमानुसार तीन साल में ट्रांसफर किया जा सकता है। साथ ही मप्र शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 12 नवंबर 1997 को एक आदेश जारी किया, जिसमें अजा, अजजा एवं पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों से भेदभाव किए जाने एवं बार-बार उनका ट्रांसफर कर परेशान किए जाने का एक आदेश भी जारी किया गया। नियम आदेश को ताक पर रख दलित वर्ग के उपयंत्री को वरिष्ठ अधिकारी परेशान कर रहे हैं। उपयंत्री ने प्रमुख अभियंता एवं कलेक्टर से भी इस संबंध में शिकायत की है।

नियम से ही ट्रांसफर किया

Ãपिछोरमेंउपयंत्री की आवश्यकता है, इसलिए वहां ट्रांसफर किया गया। कई बार परिस्थितिवश नियमों से हटकर भी स्थानांतरण किए जाते हैं। जो कुछ भी किया वो नियम से ही किया।

-पीएनकोरी,सीईजलसंसाधन विभाग ग्वालियर