शिकायत करने आए, नाम पूछे तो हो गए चुप
मंगलवारको कलेक्टोरेट में हो रही जनसुनवाई में पिछोर के ग्राम इमलिया से आए एक महिला दो पुरुष बोले कि हमने जमीन की रजिस्ट्री करा ली है, लेकिन नामांतरण करने के बदले में रिश्वत मांग रहे हैं। रिश्वत की बात सुनते ही कलेक्टर राजीव दुबे ने कहा कि कौन है जो तुमसे रिश्वत मांग रहा है, उसका नाम बताओ। ग्रामीण इधर-उधर की बात करने लगे, इस पर कलेक्टर ने फिर कहा कि तुम सिर्फ उसका नाम बताओ, उसे यहीं बुलवाते हैं। यदि तुम्हारी बात सच निकली तो उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे और यदि झूठ निकली तो तुम्हें जेल भेजेंगे। यह बात सुनते ही ग्रामीणों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई।
ग्राम इमलिया से आई हरकुंवर उसके पति-पुत्र ने जो आवेदन दिया, उसके अनुसार उन्होंने जिस जमीन की रजिस्ट्री करवाई है, उसमें विरोधी पक्ष के किसी व्यक्ति ने आपत्ति लगा दी है। आपत्ति का निराकरण होने की वजह से उसका नामांतरण नहीं हो पा रहा है। एडीएम जेड यू शेख ने कहा कि अभी तो तुम्हारा मामला तहसील में पहुंचा ही नहीं है तो रिश्वत का सवाल कहां से गया। यह बात सुनते ही वे ग्रामीण चुप हो गए और आवेदन लेकर वापस चले गए।
तुमनेतो न्यायालय को गलत जानकारी दे दी :बैराड़ नगर पंचायत में शामिल हुए ग्राम कालामढ़ से दो युवक शिकायत लेकर आए कि हमारा निर्माण अतिक्रमण बताकर तोड़ दिया, जबकि वो ग्राम पंचायत के रिकार्ड में सही है। एडीएम ने उनसे कहा कि अब तो कालामढ़ नाम की कोई पंचायत ही नहीं है, बल्कि वो तो नगर पंचायत बैराड़ में शामिल हो गई। आवेदन में लगे एक आदेश को देखकर एडीएम बोले कि तुमने तो न्यायालय को भी गलत जानकारी दे दी। क्योंकि बैराड़ नगर पंचायत का तो नवंबर में ही चुनाव हो गया और वहां कालामढ़ पंचायत तभी से खत्म भी हो गई। अब कुछ नहीं हो सकता।
तुमअपनी मदद का रास्ता खुद बंद कर आए :जनसुनवाई में जिला पंचायत का एक कर्मचारी शिकायत लेकर आया कि मुझे पहले सस्पेंड कर दिया था, लेकिन जब बहाल होकर आया तो मेरी जगह दूसरे कर्मचारी को नियुक्त कर दिया। मेरी अपने पुराने पद पर नियुक्ति की जाए। आवेदन के साथ में न्यायालय का एक आदेश भी था, जिसमें स्थिति यथावत रखने का आदेश दिया गया। उस आदेश को देखते ही एडीएम बोले कि तुम तो ऐसा आदेश ले आए कि हम चाहते हुए भी तुम्हारी सीट पर नहीं भेज सकते, क्योंकि न्यायालय ने ही यथास्थिति रखने की बात लिखी है।
जनसुनवाई में निर्देश देते कलेक्टर।
जनसुनवाई