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फीस, ड्रेस, किताब के क्या होंगे नियम, नहीं चेते अफसर

6 वर्ष पहले
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निजी स्कूल संचालकों की मनमानी रोकने प्रशासन नहीं दिखा रहा सक्रियता

भास्करसंवाददाता|शिवपुरी

निजीस्कूलों में फीस, ड्रेस, किताबों के नाम पर चलने वाली मनमानी को रोकने के लिए प्रशासन ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाए हैं, जबकि नया सत्र चालू होने में कुछ ही महीने शेष रह गए हैं। बीते साल जब स्कूल संचालकों ने मनमानी की और इसका विरोध हुआ तब तक ड्रेस और किताबों की सप्लाई छात्रों को हो चुकी थी। इसके बाद प्रशासन ने नए सत्र से गाइड लाइन बनाने की बात कही थी, लेकिन अब वही कहानी फिर से दोहराने की तैयारी में निजी स्कूल संचालक लगे हैं। छात्रों के अभिभावकों की मांग है कि इस मनमानी को रोकने के लिए गाइड लाइन बनाने कार्रवाई की जरूरत है जिसका पालन प्रशासनिक अधिकारियों को कराना है लेकिन जिला प्रशासन अभी तक नहीं चेता है।

पिछलेसाल जैसी गलती हो इस बार

स्कूलसंचालकों की मनमर्जी को लेकर बीते साल कई पालकों ने रैली और ज्ञापन देकर अपना विरोध जताया था। तत्कालीन कलेक्टर आरके जैन ने डीपीसी को भेजकर कई निजी स्कूलों की जांच भी कराई थी जिसमें ये पाया गया था कि निजी स्कूलों में ड्रेस, किताब और फीस के नाम पर मनमानी चल रही है, लेकिन इस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उस समय शैक्षणिक सत्र के तीन माह होने पर ड्रेस और किताबें वापस होने की बात कहकर प्रशासन ने अगले सत्र से कड़े कदम उठाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया गया है। अब पिछले साल जैसी गलती हो इसलिए अभी से आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है।

धारा144 का भी नहीं हुआ उपयोग

बीतेसाल लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त एसके पाल ने निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कलेक्टर को पत्र लिख धारा 144 का उपयोग करने की सलाह दी, लेकिन इसके बाद भी जिला प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाए। आयुक्त ने अपने पत्र क्रमांक 735/ 2014 में प्रदेश के सभी कलेक्टरों को सलाह दी थी कि निजी स्कूलों की मोनोपॉली को नियंत्रित किए जाने की आवश्यकता है। आयुक्त ने लोकहित में सभी कलेक्टरों कहा था कि वह धारा 144 का उपयोग कर सकते हैं।

डीपीसीकी जांच ठंडे बस्ते में

{पिछले साल कलेक्टर के आदेश पर डीपीसी शिरोमणि दुबे ने जांच की तो इस जांच के बाद अभी तक मनमानी करने वाले स्कूल संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

{ डीपीसी ने जांच के दौरान पाया कि कई निजी स्कूलों में मप्र पाठ्य पुस्तक निगम और एनसीआरटी की किताबें नहीं चल रही हैं। निजी प्रकाशकों की किताबें और फीस के नाम पर भी मनमानी चल रही है।

{ कई स्कूलों में फीस मनमाने ढंग से बढ़ाई गई है और प्रवेश शुल्क के नाम पर भी हर साल वसूली हो रही है।

{ अब अभिभावकों की मांग है कि नए सत्र से पहले गाइड लाइन बनाकर आवश्यक कदम इस मनमानी को रोकने के लिए उठाए जाएं।

नियम बनने चाहिए

^पिछलेसाल सभी अभिभावकों ने स्कूलों में चलने वाली मनमानी के खिलाफ ज्ञापन दिया था तब प्रशासन ने नए सत्र से आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था लेकिन प्रशासन ने अभी तक कोई गाइडलाइन नहीं बनाई है। वीरेंद्रशर्मा, अभिभावक,शिवपुरी

नहीं माने तो कार्रवाई

^स्कूलसंचालकों को दिशा-निर्देश तो पिछले साल ही दे दिए थे लेकिन इस बार सख्ती से इनका पालन कराया जाएगा। नियम नहीं मानेंगे तो कार्रवाई करेंगे। बीएसदेशलहरा, डीईओ, शिवपुरी

रिपोर्ट कलेक्टर को दी

^पिछलेसाल कई स्कूलों में एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें मिली थीं। जांच रिपोर्ट कलेक्टर को दी थी। अब वहीं से कार्रवाई होना हैं। शिरोमणिदुबे, डीपीसी, शिवपुरी

साल भर पूर्व निजी स्कूलों में जांच करते डीपीसी शिरोमणि दुबे (फाइल फोटो)।