- Hindi News
- 200 करोड़ की वसूली अटकी, संकट में सहकारी, ग्रामीण बैंक
200 करोड़ की वसूली अटकी, संकट में सहकारी, ग्रामीण बैंक
वसूली प्रक्रिया में सुधार नहीं हुआ तो रिजर्व बैंक कामकाज पर लगा सकता है रोक
रंजीतगुप्ता| शिवपुरी
जिलासहकारी बैंक और कृषि ग्रामीण विकास बैंक (पूर्व नाम भूमि विकास बैंक ) में ऋण के रूप में मनमाने ढंग से बांटे गए 200 करोड़ रुपए की वसूली अटक गई है। इससे दोनों ही बैंक संकट में गए हैं। ऋण वितरण की वसूली होने से इन दोनों ही बैंकों के अधिकारी परेशानी में है। इन बैंकों का एनपीए (नोन परफार्मिंग असेट) भी बढ़ गया है। दोनों बैंकों की देनदारियां बढ़ती जा रही हैं। वसूली प्रक्रिया पर ध्यान नहीं दिया तो एनपीए लगातार बढ़ता चला जाएगा और बैंक धारा 11 में चले जाएंगे। इनके कार्य व्यवहार पर भारतीय रिजर्व बैंक रोक लगा देगा जिससे इन बैंकों के संचालन को लेकर संकट खड़ा हो सकता है।
लोनवितरण में फर्जीवाड़ा
{दोनोंबैंकों में संचालक मंडल से जुड़े नेताओं ने मनमाना लोन बांटा।
{ पीडीएस में घोटाले के चलते समितियों ने बैंक को पैसा नहीं दिया।
{ बीते 3 साल में तमाम प्राकृतिक आपदाओंं के कारण कृषि ऋण की वसूली भी धीमी है। अफसर बहाना बनाकर के वसूली लटकाएं हुए हैं।
वसूली के प्रयास में लगे हैं
^हमारेबैंक में जो लोन बंटा है वह मेरे कार्यकाल से पहले का है। पूर्व संचालक मंडल ने क्या किया इस बारे में मैं कुछ नहीं कहूंगा। फिर भी हम वसूली के प्रयास में लगे हुए हैं। विनोदकोटिया, महाप्रबंधक, ग्रावि बैंक
स्टाफ कम, कैसे हो वसूली
^हमारेपास स्टाफ का अभाव है इसलिए ऋण वसूली धीमी है। फिर भी वसूली के प्रयास जारी हैं। वैसे संभाग में हमारे बैंक की स्थिति अन्य सहकारी बैंकों से काफी अच्छी है। भैयासाहब लोधी, अध्यक्ष, जिस बैंक शिवपुरी
कलेक्टर सख्ती दिखाएं
^बैंकों की बकाया ऋण वसूली को लेकर कलेक्टर से कहा है कि वह सख्ती दिखाएं। बकायादारों पर कार्रवाई करें। गबन धोखाधड़ी के मामलों में एफआईआर दर्ज कराएं। केकेखरे, कमिश्नर, ग्वालियर संभाग
कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक
53साल पुराने कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक द्वारा पूर्व में बांटा गया 40 करोड का ऋण वसूलने में अधिकारियों को पसीना रहा है। बैंक में तालाबंदी के हालात हैं। पिछले कुछ सालों से लगातार घाटे में जाने के बाद 1 अप्रैल 2006 से ऋण बांटने का काम बंद कर दिया गया है। वर्ष 2013-14 में 25 करोड़ रुपए की वसूली का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 1 करोड़ 44 लाख रुपए की वसूली ही हो पाई है।
जिला सहकारी बैंक
जिलासहकारी केन्द्रीय बैंक के 164 करोड़ 30 लाख रुपए ऋण के रूप में लंबित हैं। वसूली की प्रक्रिया इतनी सुस्त है कि केवल 11 करोड़ की वसूली बीते दिनों हो पाई है। इस बैंक का प्राथमिक साख सहकारी संस्थाओं पर ही 161 करोड़ रुपया बकाया है। जिन लोगों पर ऋण बकाया है उनमें कई ऐसे बड़े लोग हैं जिनसे वसूली में बैंक अधिकारियों को पसीना रहा है। इस बैंक का एनपीए भी बढ़ता जा रहा है।
कोर्ट रोड स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक