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- झगड़े में घायल पति का मेडिकल कराने ले गई पुलिस, पत्नी को दबंगों ने जिंदा जलाया
झगड़े में घायल पति का मेडिकल कराने ले गई पुलिस, पत्नी को दबंगों ने जिंदा जलाया
{पुलिस की लापरवाही के कारण हुई महिला की हत्या, पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
भास्करसंवाददाता| शिवपुरी
दबंगोंको गाली-गलौज करने से रोकना एक दंपति को महंगा पड़ गया। दबंगों ने पहले पति को लाठियों से पीटा, उसके बाद उसकी प|ी को घर के पास जिंदा जलाकर मार डाला। महिला ने नायब तहसीलदार मनीष जैन को दिए मृत्यु पूर्व बयान में कहा है कि उसे पांच लोगों ने केरोसिन डालकर जिंदा जलाया है। महिला के पति ने आरोप लगाया कि पुलिस की लापरवाही के कारण ही उसकी प|ी की जान गई, क्योंकि जब पुलिस उसका मेडिकल कराने ले गई तब उसकी प|ी को साथ में नहीं ले गई। घटना सोमवार की रात अमोला थाना क्षेत्र के सिरसौद में घटित हुई। पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।
सिरसौद निवासी संतोष बरहार सोमवार की रात अपनी प|ी कमला के साथ घर के बाहर बैठा था। उसी समय घर के पीछे से गालियां देने की आवाज आने पर दोनों ने वहां पहुंचकर हरचरण, जीतू, नरेंद्र, महीपा , विनोद समेत 6-7 लोगों को ऐसा करने से रोका। इस पर उन लोगों ने संतोष को लाठियों से पीट दिया। संतोष को लहूलुहान हालत में लेकर कमला अमोला थाने पहुंची। पुलिस उसका मेडिकल कराने के लिए करैरा रवाना हुई। पीड़ित संतोष के अनुसार जब मुझे मेडिकल के लिए करैरा ले जाया जा रहा था, तब मेरी प|ी भी पुलिस वाहन में बैठ गई, लेकिन पुलिस ने सिरसौद चौराहे पर उसे यह कहकर उतार दिया कि तुम घर जाओ। मैंने पुलिस वालों से कहा कि वह अकेली घर जाएगी तो वे लोग उसे मार डालेंगे। शेष|पेज5 पर
पुलिस यह करती तो टल सकती थी वारदात
शिवपुरी। महिलाकी मौत के बाद विलाप करते परिजन साथ में घायल पति संतोष बरहार (सिर पर पट्टी बांधे) इनसेट-महिला कमला
महिला को घर जाने के लिए पति ने ही कहा था
^ महिला को घर जाने के लिए उसके पति ने ही कहा था। घटना के कई कारण सामने रहे हैं, इसलिए अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।^ -एमएससिकरवार, एसपी,शिवपुरी
> दोनों पक्षों के बीच झगड़ा होने के बाद जब स्थिति तनावपूर्ण हुई तो तत्काल पुलिस फोर्स गांव में भेजा जाना चाहिए था।
> महिला को अकेला गांव नहीं भेजना था, क्योंकि आरोपी गांव में ही मौजूद थे।
> संतोष का मेडिकल चेकअप कराने के बाद यदि पुलिस सीधे गांव पहुंच जाती तो घटना को टाला जा सकता था। क्योंकि जितनी देर में संतोष को सिरसौद चौराहा से गांव तक