पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • हिंदी में अन्य भाषाओं को ग्रहण करने की अद्भुत क्षमता

हिंदी में अन्य भाषाओं को ग्रहण करने की अद्भुत क्षमता

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
शिवपुरी। हिंदीभाषा में अन्य भाषाओं के शब्दों को ग्रहण करने की शक्ति और उन्हें अपने सांचे में ढालने की अद्भुत क्षमता है। हिंदी ने फारसी, उर्दू, पंजाबी, मराठी, अंग्रेजी आदि भाषाओं के शब्दों को ग्रहण कर अपने व्याकरण में ढाला है साथ ही अन्य भाषाओं के साथ अपने जीवन संबंधों को प्रमाणित किया है। यह बात डॉ. लखनलाल खरे ने श्री रामकिशन सिंहल फाउंडेशन द्वारा दुर्गामठ में आयोजित एक विचारगोष्ठी कार्यक्रम में व्यक्त किए। हिंदी दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन विनय प्रकाश नीरव ने किया, जबकि मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध गजलकार रामअवध विश्वकर्मा के साथ साथ युसुफ अहमद कुर्रेशी, अरूण अपेक्षित, दिनेश वशिष्ठ आदि ने राजभाषा हिन्दी के अन्य भाषाओं से अंतरसंबंधों के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था सचिव डॉ. महेन्द्र अग्रवाल ने मुख्य अतिथि का परिचय देते हुए फाउंडेशन की ओर से श्रीफल स्मृति चिह्न भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम में विचार गोष्ठी के उपरांत कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया, जिसमें कवि साहित्यकार युसुफ अहमद कुर्रेशी की अध्यक्षता में एक कविगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। जिसमें अरूण अपेक्षित, भगवान सिंह यादव, राजाराम आर्य, डॉ. विजय निराला, जगदीश गर्ग, रामकिशन मौर्य, राजेन्द्र सिंह, अखलाक खान, विनय प्रकाश नीरव, प्रदीप अवस्थी, लोकेश तिवारी, सुभाष पाठक, डॉ. महेन्द्र अग्रवाल, राकेश मिश्रा, राकेश सिंह, शिवनारायण सेन, याकूब साबिर, राजकुमार श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव, मुबीन अहमद मुबीन, डॉ. रामसिंह अक्कड़, राम अवध विश्वकर्मा आदि ने काव्य पाठ किया।