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दस साल के दक्ष की बारात देख चौंके लोग

5 वर्ष पहले
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सिरोंज। दस साल का दक्ष मुजूमदार। दुल्हा बना घोड़े पर सवार है। उसके सिर पर बाकायदा कलगीदार साफा और कंधे पर चांदी की कटार टंगी हुई है। साथ में चल रहे बैंड-बाजे की धुन पर बाराती थिरक रहे हैं। जिसने भी यह बारात देखी आठ साल के दूल्हे को देखकर अचरज में पड़ गया। जब पता किया तो बात सामने आई मराठी परंपरा में जनेऊ संस्कार में भी बारात निकाली जाती है।

नगर के पटवाटोला स्थित प्राचीन राम मंदिर में सेवा करने वाले मिलिंद मुजूमदार के पुत्र दक्ष मुजूमदार का गुरुवार को व्रत बंध अर्थात जनेऊ संस्कार होना था। मराठी परंपरा के अनुसार जनेऊ संस्कार के अवसर पर बालक की बारात निकाली जाती है। इसी परंपरा के चलते गुरुवार सुबह नगर के मुख्य बाजार में चांदनी चैक से दक्ष की बारात शुरू हुई। दुल्हा बने 8 वर्षीय दक्ष ने बाकायदा सिर पर कलगीदार साफा पहना हुआ था।
चांदी कटार उसके कंधे पर टंगी हुई थी। बारात की अगवानी कर रहे बैंड से निकल रही धुन पर बाराती थिरकते हुए चल रहे थे। बारात को आकर्षक बनाने के लिए दक्ष के पिता मिलिंद ने बाकायदा दो अन्य घोड़े भी बुलाए थे। बारातियों के साथ ढपले की धुन पर ये दोनों घोड़े भी लगातार थिरकते रहे थे। नगर के छोटा बाजार, कोर्ट गेट, राज बाजार, पुराना बस स्टैंड तथा तहसील रोड होते हुए यह बारात मंशापूरन हनुमान मंदिर के समीप स्थित संस्कार गार्डन पर पहुंचकर समाप्त हुई। इस अवसर पर भोज का आयोजन भी किया गया।

क्या है महाराष्ट्रीयन परम्परा

महाराष्ट्रीयन परम्परा में जनेऊ संस्कार के अवसर पर बच्चे की बारात निकाली जाती है। यह जानकारी देते हुए दक्ष की मां आरती मुजूमदार ने बताया कि महाराष्ट्र में इस परम्परा को फेरी कहा जाता है। बुधवार को हमारे परिवार में माता-पूजन एवं मंडप के साथ ही दक्ष की गुरु दीक्षा कार्यक्रम भी सम्पन्न हुआ है। अब दक्ष सभी धार्मिक रीति-रिवाजों में भाग ले सकेगा।
आगे की स्लाइड़स में देखें फोटोज...


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