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सेमिनार में बताई सिरोंज की कला और संस्कृति
>सद्भावना मंच ने किया आयोजन
सद्भावनामंच एवं इंतेसाब पब्लिकेशन द्वारा आयोजित सेमिनार के दूसरे दिन सिरोंज की कला एवं संस्कृति के संबंध में चर्चा का दौर चला। सेमिनार के समापन पर काव्य गोष्ठी एवं मुशायरे का आयोजन भी किया गया।
अखिल भारतीय सेमिनार में देश भर के ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों ने सहभागिता कर कला एवं साहित्य में सिरोंज के योगदान पर प्रकाश डाला। सेमिनार के दूसरे दिन के आखरी सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर मुख्तार शमीम ने की। भोपाल से आई शायरा सैयद अहमद मुर्तजा ने नजर की शायरी पर प्रकाश डाला। एनसीआरटी दिल्ली के प्रोफेसर मोहम्मद नोमान खान ने नातिक मालवी की शायरी की विशेषताओं की जानकारी दी। डा.सादिक अली खान ने सिरोंज के ऐतिहासिक महत्व तथा अब्दुल सुबूर खान ने कौमी एकता से संबंधित जानकारी दी। कहानीकार अहद प्रकाश ने वकार फातमी की साहित्यिक सेवाओं पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ साहित्यकार रशीद अंजुम ने डा. सैफी सिरोंजी की अदबी खिदमत और सिरोंज की कला संस्कृति पर प्रकाश डाला।
जिया फारूखी ने सैफी सिरोंजी की आपबीती तथा अरशद हुसैन ने धार्मिक सद्भाव के महत्व की जानकारी दी। सेमिनार का संचालन मेहमूद मलिक ने किया तथा आभार अनिल अग्रवाल ने जताया। डा. शान फखरी की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी तथा मुशायरे का आयोजन भी हुआ। इसमें सैफी सिरोंजी, रईस फैजी, अजमत दानिश, सुलैमान मजाज, अजीज फराज, कमर अली, इलयास रजा, नोशे हैदर, मतीन नदवी, सादिक अली, हनीफ दर्द, हामिद सिरोंजी तथा सुलेमान अजहर ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।
िसरोंज। दूसरेदिवस सेमिनार को संबोधित करते वक्ता।