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जमीन में हिस्सा नहीं मिलने पर की थी हत्या

6 वर्ष पहले
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धानौदा के शंकरपुरी में सप्ताह भर पहले हुई हत्या एवं डकैती का खुलासा पुलिस ने कर दिया है। वारदात को कोर्ट के फैसले के बाद मृतक को मिली जमीन में हिस्सा लेने के लिए अंजाम दिया गया था। घटना को सात लोगों ने मिलकर अंजाम दिया था। इनमें से पांच लोग सागर जिले के तथा दो धानौदा के रहने वाले हैं।

6 एवं 7 फरवरी की रात क्षेत्र के धानौदा में स्थित खेत शंकरपुरी में टपरिया में सो रहे ग्राम लालाटोरी निवासी छतरसिंह कुर्मी तथा उसकी मां प्रेमबाई पर अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया था। मारपीट के बाद ये लोग प्रेमबाई के गले और पैर में से चांदी के जेवर तथा टपरिया में रखे 20 हजार रुपए भी लूट कर ले गए थे। घटना में बुरी तरह घायल छतरसिंह तथा प्रेमबाई को पुलिस ने सिरोंज अस्पताल में भर्ती कराया था। गंभीर रूप से घायल छतरसिंह की भोपाल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वारदात की जांच एवं पूछताछ के लिए सिरोंज एसडीओपी केके उपाध्याय तथा थाना प्रभारी दिनेश प्रजापति लगातार तीन दिन तक धानौदा तथा लालाटोरी गए। लगातार पूछताछ के बाद धानौदा में रहने वाले धनराज ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। धनराज ने बताया कि उसने भाई रामकृपाल सिंह के साथ ही सागर के भानगढ़ थाना क्षेत्र के पारासरी निवासी लाखन कुर्मी, विक्रम कुर्मी, भानगढ़ के बंदई निवासी सोनू अहिरवार तथा बीना निवासी धीरू ठाकुर एवं शैलेन्द्र कुशवाह के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया था। इन सभी लोगों को सिरोंज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। रामकृपाल अभी फरार है।

जमीन का था विवाद
मृतक छतरसिंह के पिता की मौत बचपन में ही हो गई थी। उसकी मां प्रेमबाई तथा परिवार का भरण-पोषण गांव में ही रहने वाले रामलाल कुर्मी ने किया। रामलाल ने अपनी 15 बीघा जमीन भी प्रेमबाई के नाम कर दी थी। इस जमीन पर गांव के ही भावसार परिवार का कब्जा था। रामलाल की मौत के बाद छतरसिंह एवं भावसार परिवार का विवाद कोर्ट में चला गया। पखवाड़े भर पहले कोर्ट ने इस जमीन पर छतरसिंह का कब्जा करवा दिया था। कोर्ट में केस के दौरान रामलाल के भतीजे धनराज ने भी छतरसिंह का सहयोग दिया था। जब फैसला आ गया तो धनराज ने छतरसिंह से अपना हिस्सा मांगा।