पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • ज्ञान का मूल्यांकन प्राप्तांकों से नहीं होता

ज्ञान का मूल्यांकन प्राप्तांकों से नहीं होता

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जीवनपर चर्चा सभी ग्रंथ करते हैं, लेकिन मृत्यु के उपरांत जीवन के रहस्य पर चर्चा संस्कृत के ग्रंथों में हुई है। इस तरह जीव के अनवरत यात्रा चक्र को अभिव्यक्त करने वाली भाषा संस्कृत है, जिसे पढ़कर मेक्समूलर, फादर कागिल बुल्के, प्रो. वानान्निकोव जैसे विद्वान भी अभिभूत हो गए थे।

यह बात शासकीय महाविद्यालय रतलाम के प्राचार्य डॉ. विक्रम दत्ता ने कही। वे वैकुंठधाम गुरुद्वारा में ‘विद्यार्थी प्रतिभा सम्मान’ समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा ज्ञान का मूल्यांकन प्राप्तांकों से नहीं जीवन को पूर्ण बनाने की दिशा में बढ़ने से होता है। डॉ. दत्ता ने हिंदी की महत्ता एवं आवश्यकता को सरल भाषा में समझाया। कार्यक्रम में जिले के ख्यात साहित्यकार डॉ. रामशंकर त्रिवेदी ‘चंचल’ ने विद्यार्थियों को अच्छे अंक प्राप्त करने के साथ अच्छे इंसान होने की प्रेरणा दी। एलएन पाठक ने संस्कृत की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस दौरान ‘जब कोई फैसला कीजिए, दिल से भी मशविरा कीजिए’ गजल गाकर डॉ. दीनदयाल चौरसिया ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजन के दौरान आश्रम प्रभारी पं. भूदेव आचार्य का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर न्यास के पदाधिकारी राजेंद्र अग्निहोत्री, श्रीरंग आचार्य, कंचनभाई पाटनवाड़िया, भागवत शुक्ल, आश्रम प्रभारी भूदेव आचार्य, संस्थापक न्यासी अनंतकुमार आचार्य, तुषार भट्ट, ओमप्रकाश वैरागी, रमेंद्र सोनी आदि मौजूद थे। संचालन अशोक भटनागर ने किया। आभार भागवत प्रसाद शुक्ल ने माना।

इनकाकिया सम्मान

कार्यक्रममें विद्यार्थियों का सम्मान भी किया गया, जिसमें इस वर्ष संस्कृत में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले करणसिंह परमार, विंकेस मुणिया, भूमिका नायक, घनश्याम पाटीदार, प्राची पालीवाल, आयुषी खरे, जीनल जैन, समीरा सैय्यद कक्षा 12वीं के वीरेंद्र खतेड़िया, हिमानी जैन, दीपिका राठौर, शिफा शेख, मुस्कान, पुष्पेंद्र सस्तिया सहित 39 छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया।

प्रतिभावान छात्रा को सम्मानित करते अतिथि।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों उनके पालकों ने भाग लिया।