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कलश यात्रा के साथ श्रीप्रेम नारायण कथा प्रारंभ

7 वर्ष पहले
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टीकमगढ़। श्री प्रेम कथा प्रारंभ होने से पूर्व शहर में शोभायात्रा निकाली गई।

भास्कर संवाददाता| टीकमगढ़

शहरके नजरबाग मंदिर परिसर में गुरुवार से श्री प्रेम नारायण कथा का आयोजन शुरू किया गया है। पहले दिन दोपहर बजे नगर में कलश यात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर मंगल गीत गाए।

नगर भ्रमण के बाद यात्रा नजरबाग मंदिर पहुंची। दोपहर 2 बजे अयोध्या से पधारे श्रीराम जी महाराज ने श्रीप्रेम नारायण कथा का वाचन किया। महाराज ने कहा कि श्री प्रेम रामायण कथा में परम पूज्य श्री रामहर्षण दास जी महाराज ने श्री सीता राम जी महाराज एवं श्री सिद्धि लक्ष्मीनिधि जी का चरित्र, अपने जप-साधना के मध्य देखी हुई दिव्य लीलाओं का वर्णन किया है। उन्होंने श्रीराम चरित्र का वर्णन करते हुए कहा िक 14 वर्ष के वनवास के बाद जब भगवान श्रीराम अयोध्या वापस आए तो उनका राज्याभिषेक किया गया। विभीषण, हनुमान, सुग्रीव, बाली, जामवंत, निषादराज सहित अनेक सहयोगीजन 6 माह तक अयोध्या में रुके रहे। उनका पूरे सम्मान के साथ आदर सत्कार किया गया। फिर एक-एक कर सबको विदा किया गया। इस बीच हनुमान जी महाराज असमंजस की स्थिति में रहे। वे अपने गुरु सूर्य भगवान की आज्ञा से सुग्रीव के साथ रहने को विवश थे। लेकिन उनका मन भगवान श्रीराम के चरणों की सेवा में लगा था। जब सुग्रीव अपनी वानर सेना के साथ लौटने लगे तो हनुमान जी महाराज ने संकोच वश कहा कि अगर आपकी आज्ञा हो तो कुछ दिन अयोध्या में रुक जाऊं। हनुमान जी के आग्रह पर सुग्रीव ने कहा कि राजतिलक के दौरान उपस्थित जनों ने कुछ कुछ उपहार श्रीराम को भेंट किए हैं। मैनें उन्हें कोई उपहार भेंट नहीं किया। उन्होंने हनुमान जी महाराज को सदैव श्रीराम की सेवा में उपस्थित रहने का आर्शीवाद दिया। श्रीराम जी महाराज ने कहा कि कलयुग में हनुमान जी हर क्षण श्रीराम कथा का श्रवण करने उपस्थित रहते हैं। उनकी पूजा अर्चना करने से मनुष्य के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।