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तंगी से निपटने महिलाओं ने खोला ग्रेन बैंक

7 वर्ष पहले
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छत्तीसगढ़और राजस्थान की तर्ज पर पृथ्वीपुर के बंजारीपुरा ग्राम की महिलाओं ने आपसी सूझबूझ से गेहंू संग्रह केंद्र .ग्रेन बैंक. खोला है। यहां पर एक समूह की 20 महिलाएं माह के हर तीसरे बुधवार को बैठक करती हैं और अपने साथ एक बड़ा गिलास गेहूं लेकर आती हैं। सभी महिलाएं गेहूं का स्टोरेज करके उसे अपने पास रखती हैं और तंगी से जूझने वाले सदस्यों को उधार दे देती हैं। बाद में वह सदस्य समूह को रुपए या फिर अनाज लौटा देता है।

महिलाओं ने यह कदम मप्र महिला एंव वित्त विकास निगम की ओर से संचालित तेजस्वनी कार्यक्रम से प्रेरित होकर उठाया है। टीकमगढ़ में मप्र की यह एक अनूठी पहल है। दरअसल मप्र में पीडीएस के तहत गरीबों को अनाज देने की योजना भले ही चला रही है, मगर जब इसका फायदा नहीं मिला तो महिलाओं ने खुद ही ग्रेन बैंक की स्थापना कर ली। इससे महिलाओं को दो तरह के लाभ हो रहे हैं, जिन महिलाओं के पास आर्थिक संकट होता है, उन्हें गेहूं बेचकर राशि उपलब्ध करा दी जाती है, जिनके पास अनाज का टोटा होता है, उन्हें अनाज दे दिया जाता है। समिति की 20 सदस्यीय महिलाएं अब तक बड़े स्तर पर गेहूं का संग्रह कर चुकी हैं। समूह की सदस्य खिलनबाई ने बताया कि ग्रेन बैंक के माध्यम से औसतन 5 से 10 क्विंटल से अधिक गेहूं का स्टाक रहता है। जब भी किसी समूह सदस्य को परेशानी जाती है। वे तत्काल गेहूं उपलब्ध करा देते हैं। इसके अलावा गेहूं बेचकर भी राशि उपलब्ध करा दी जाती है। बाद में संबंधित सदस्य राशि वापस कर देता है। जिससे समूह की आय में बढ़ोत्तरी होती है। इसमें शासन की ओर से कोई राशि जमा नहीं की जाती है।

बंजारीपुरा में संचालित ग्रेन बैंक में बैठक के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।

स्पेशल टास्क में लिया था निर्णय

एकअन्य सदस्य शीला कुशवाहा ने बताया कि हर बैठक में एक टास्क दिया जाता है। जिसमें समिति के सदस्य सुझाव रखते हैं। नॉलेज मैनेजमेंट के अंतर्गत उन्हें पता चला कि छत्तसीगढ़ और राजस्थान में चावल और गेहूं का संग्रह करने के लिए समूह ग्रेन बैंक चला रहे हैं। महिलाओं ने कार्यप्रणाली समझी और बैंक प्रारंभ कर दिया। जिसके अब अच्छे परिणाम सामने रहे हैं। तेजस्विनी कार्यक्रम के जिला समन्वयक सुशील वर्मा ने बताया कि टीकमगढ़ में यह अपने आप में एक अनूठी पहल है। जो कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए वारदान है। उन्होंने बताया कि