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अब तो फसल भी पीली होकर सूखने लगी, िफर भी नहीं मिल रही खाद

7 वर्ष पहले
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अब गेहूं की फसल को तेज ठंड की भी जरूरत

कुछ किसानों ने हाट बाजार से 600 रुपए बोरी में खाद खरीदी, फसल की हालत देखकर किसानों की चिंता बढ़ी

नगरसंवाददाता|सिराली

क्षेत्रके आदिवासी गांव पटाल्दा में खाद की कमी के चलते अब गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी है। गांव के किसान मुन्नालाल, मिश्रीलाल, दादू कोरकू ने बताया कि पटाल्दा सहित क्षेत्र के नीमढाना, सांवरी, झिरपी, भुराली आदि गांवों में गेहूं की फसल में खाद की कमी के चलते अब बढ़त रुक गई है। फसल पीली पड़कर सूखने लगी है। जानकारी के अनुसार पहाड़ी, हलकी जमीन में गेहूं की फसल की बोवनी के बाद खाद और पानी पहली जरूरत होती है। गौरतलब है कि क्षेत्र में खाद के संकट के चलते आदिवासी क्षेत्र के इन छोटे किसानों को तो खाद मिल ही नहीं सकी है। ऐसे में आदिवासी किसान फसल को लेकर बेहद चिंतित हैं।

सोडलपुर। गेहूं की फसल को अब अच्छी ठंड की जरूरत है।

टिमरनी। किसानों ने लाइन में लगकर यूरिया खाद ली।

लाइन में लगकर लेना पड़े खाद के िलए टोकन

पुलिस की देखरेख में सोसाइटी से खाद बांटी

खाद की व्यवस्था बनाई जा रही है

^शासनके माध्यम से वन समितियों के जरिए गरीब आदिवासी, छोटे किसानों के लिए खाद की व्यवस्था बनाई जा रही है। हमने कलेक्टर हरदा से आदिवासी किसानों के लिए खाद देने का आग्रह किया है। कलेक्टर ने भी आश्वासन दिया है, देखते हैं। -संतोष पाटिल, जिलासहकारी बैंक अध्यक्ष होशंगाबाद, हरदा

खाद और पानी पहली जरूरत है

^आदिवासीकिसान ज्यादातर पहाड़ी पर बसे हैं। जहां जमीन हलकी होती है। ऐसी जमीन पर पहाड़ी अंचल में गेहूं बोवनी के बाद खाद और पानी पहली जरूरत होती है। दोनों में से किसी एक के भी अभाव में फसल की बढ़त रुक जाती है। ऐसे में फसल पीली पड़कर सूखने लगती है। -विजय अग्रवाल, कृषिविस्तार अधिकारी

सिराली। आदिवासी क्षेत्र के गांव पटाल्दा में खाद की कमी से गेहूं की फसल पीली पड़कर सूखने लगी।

खाद 600 रुपए बोरी बेची

हंडिया। अबगांवकलां में खाद मिलने का इंतजार करते गेट के पास खड़े किसान।

खेती-किसानी| पटाल्दा के किसानों को खाद नहीं मिली, गेहूं की फसल पर संकट मंडराने लगा