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झिरी का गंदा पानी पीने को मजबूर महागांव टोला के आदिवासी

6 वर्ष पहले
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वनांचल में गर्मी के दिन नजदीक आते ही जलस्तर नीचे जला गया है। ग्राम पंचायत राजाबरारी के महागांव टोला के एक हजार ग्रामीण पेयजल संकट जूझ रहे हैं। वे गांव से एक किमी दूर स्थित एक झिरी से पानी ला रहे हैं। आदिवासी ग्रामीणों ने सोमवार को एसडीएम सपना लौवंशी को ज्ञापन सौंपकर गांव में पेयजल उपलब्ध कराने की गुहार लगाई।

महागांव टोला के 50 से अधिक आदिवासी ग्रामीणों ने बताया गांव में एक कुआं है। इन दिनों कुआं सूख गया है। पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। गंजाल नदी भी सूख गई है। नदी के पास एक झिरी से ग्रामीण पेयजल लेकर आ रहे हैं। इसमें मवेशी भी पानी पीते हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में पंच रुनाबाई, सदाराम पांसे, सतीश, राजू कुमरे, सुरजन सिंह, अमरदास, लच्छीराम, राधेलाल, रामचरण, पतिराम सहित अन्य आदिवासी मौजूद थे।

पानी के लिए बनाई झिरी

पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने नदी के पास गड्ढा खोदकर झिरी बनाई है। इसमें बहुत कम मात्रा में पानी निकलता है। इसी पानी को मवेशियों को पानी पिलाने में उपयोग किया जा रहा है। आदिवासी ग्रामीणों ने बताया झिरी का पानी मटमैला है। इसके कारण स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है। कई ग्रामीणों के तो इस पानी के कारण पेट दर्द होने लगे हैं।

पानी के अभाव में शौचालय बने अनुपयोगी
महागांव में स्वच्छता मिशन के तहत करीब 70 शौचालय बनाए गए हैं। पानी नहीं होने के कारण इनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहना है शौचालयों का उपयोग किया जाए तो रोजाना लगभग चार टैंकर पानी लगेगा। शासकीय योजना के माध्यम से जलापूर्ति की व्यवस्था बनाने मांग की।

प्रस्ताव शासन को भेजा है
वनांचल में जलसंकट की जानकारी मिली है। कार्ययोजना बनाकर प्रस्ताव शासन को भेजा है। पेयजल के लिए परिवहन की व्यवस्था की जाएगी। सपना लौवंशी, एसडीएम टिमरनी

झिरी से दो घंटे में पानी लेकर पहुंचते हैं घर
झिरी से पानी लाने में लगभग दो घंटे का समय लग जाता है। ग्रामीणों ने बताया गांव से झिरी दूर है। पानी लाने के लिए महिलाएं सुबह घर से निकलती हैं, तो दोपहर बाद ही वापस आती हैं। उन्होंने बताया कि झिरी का पानी मटमैला है। इसलिए उसे छानकर लाते हैं। बच्चे पढ़ाई छोड़कर पानी लाने में महिलाओं का साथ दे रहे हैं। कई महिलाएं मजदूरी करती हैं। वे इसके कारण काम भी नहीं कर पा रही हैं। इसके कारण आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।

टिमरनी। पेयजल के लिए एसडीएम से गुहार लगाते हुए आदिवासी।