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सहयोजन में नहीं पहुंचे डायरेक्टर

7 वर्ष पहले
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रतलाम। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के चुनाव की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की रोक से भाजपा को बड़ा झटका लगा है। इसके चलते गुरुवार को होने वाले दो पदों के सहयोजन में एक भी डायरेक्टर नहीं पहुंचा। सबसे ज्यादा मायूसी उन डायरेक्टरों को है जो अध्यक्ष बनने का सपना देख रहे थे। अब सभी को हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है।
15 में से भाजपा के 12 डायरेक्टर निर्विरोध थे। एक पद के लिए 24 सितंबर को चुनाव हुआ। इसमें भी भाजपा ने बाजी मारी। गुरुवार को डायरेक्टर के दो पदों के लिए सहयोजन होना था। इसके लिए भाजपा के चुनाव पर्यवेक्षक महेंद्र हार्डिया भी रतलाम आए थे। दोपहर में हाईकोर्ट से स्टे मिलने की खबर गई। जिससे सहयोजन नहीं हो पाया। सूत्रों के अनुसार पार्टी अध्यक्ष पद के लिए नाम भी तय नहीं कर पाई। हाईकोर्ट के स्थगन देने से अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बनने के लिए जोड़-तोड़ में लगे डायरेक्टरों को झटका लगा है।

स्टेकी खबर सबको लेकिन बोले कौन-भाजपा केचुनाव पर्यवेक्षक हार्डिया सुबह ही रतलाम गए थे। वे दोपहर में सर्किट हाउस पर डायरेक्टरों के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर रहे थे। तभी हाईकोर्ट के स्टे की खबर आने लगी थी। भाजपा नेता सहित कई डायरेक्टरों को भी जानकारी मिल गई थी। लेकिन पर्यवेक्षक के सामने सभी चुप रहे। बाद में सभी डायरेक्टर एक-एक कर निकल गए।

चुनाव अधिकारी, डायरेक्टर नहीं आए-गुरुवार को बाजना के डायरेक्टर के दो पदों पर सुबह 11.30 से दोपहर 1.00 बजे तक सहयोजन होना था। चुनाव अधिकारी भारतसिंह चौहान बैठे रहे लेकिन एक भी डायरेक्टर नहीं पहुंचा।
हमनेपहले ही कहा था-कांग्रेस पार्षदशांतिलाल वर्मा ने बताया चुनाव अधिकारी ने भाजपा के एजेंट के रूप में काम किया। कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों ने सही फॉर्म भरे लेकिन चुनाव अधिकारी ने निरस्त कर दिए। हमने आपत्ति ली लेकिन उन्होंने नहीं सुनी। उल्टे बड़ी संख्या में पुलिस तैनात कर दी।
स्टेका सुना है-भाजपा जिलाअध्यक्ष बजरंग पुरोहित ने बताया सहकारी बैंक चुनाव में स्टे की खबर सुनी है। इसमें रिटर्निंग अधिकारी को कोर्ट में पक्ष रखना है। चुनाव में भाजपा के 12 डायरेक्टर निर्विरोध हुए थे। सीधे मुकाबले में भी एक डायरेक्टर भाजपा का जीता। आगे जो भी हमारे पक्ष में निर्णय आने की उम्मीद है।

ये हुई गड़बड़ : सोलंकी ने बताया सूची क्र. अनुक्रमांक गलत लिखने के कारण फार्म निरस्त हुए थे। जबकि राज्य सहकारिता निर्वाचन पदाधिकारी सचिव प्रभात पाराशर द्वारा जारी निर्वाचन मार्गदर्शिका में स्पष्ट निर्देश हैं कि लिपिकीय या टंकन त्रुटि पर फॉर्म निरस्त नहीं होगा। फॉर्म दुरुस्त करवाने की जिम्मेदारी निर्वाचन अधिकारी की होगी। प्रस्तुत याचिका के साथ न्यायालय के समक्ष मार्गदर्शिका पत्रिका, निरस्त नामांकन फॉर्म की फोटोकॉपी प्रस्तुत की।

बड़े नेताओं के नामांकन भी हुए थे खारिज-बैंक चुनावमें कई बड़े सहकारी नेताओं के नामांकन खारिज हुए थे। इनमें श्रेणिक चंडालिया, रामचंद्र जाट, विजय पालीवाल, सत्यनारायण झाला प्रमुख हैं। इनमें से चंडालिया जाट पूर्व में डायरेक्टर रह चुके हैं। इसी तरह बैंक के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्रसिंह पुरोहित के करीबी सूर्यनारायण उपाध्याय का आवेदन भी खारिज हुआ था।

आगे क्या : - चुनाव अधिकारी को हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखना होगा।
- नामांकन फॉर्म हाईकोर्ट मंगवाकर जांच कर सकती है या जांच के लिए अधिकारी नियुक्त कर सकती है।
सहकारी बैंक चुनाव | स्टे के बाद अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार

सहयोजन के लिए डायरेक्टरों का इंतजार करते चुनाव अधिकारी।