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तप से तन-मन पवित्र

7 वर्ष पहले
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जैन जगत में धर्म के चार प्रकार बताए हैं। दान, शील, तप और भाव। सभी में तप वो साधना है जो तन और मन को पवित्र बना देती है। आहार के कारण होने वाली विकृति रोकती है। धर्मदास जैन संघ में तपस्वी राजेशमुनि के सान्निध्य में तप और आराधनाओं का दौर जारी है। बड़ी संख्या में समाजजन भाग ले रहे हैं।

श्रीसम्मेदशिखर तीर्थ की भाव यात्रा-पोरवाड़ों कावास स्थित आराधना भवन में साध्वीजी भव्यकल्पाश्रीजी की निश्रा में सम्मेदशिखर तीर्थ भाव यात्रा का आयोजन हुआ। सीमा लुनिया ने बताया संयम जीवन की अनुमोदनार्थ, नीरजकुमार जैन के सम्मेदशिखर महातप की पूर्णाहुति शोभना प्रदीपकुमार के पंचम तप का कार्यक्रम हुआ।

अगलेचातुर्मास की विनती-आचार्यश्री विजयर|सुंदरसूरीश्वरजी औरंगाबाद में चातुर्मास कर रहे हैं। उन्होंने मांदुगां मुंबई श्रीसंघ के आग्रह पर अगला चातुर्मास मुंबई में करने की स्वीकृति प्रदान की। जानकारी विजयकुमार लूनिया ने दी।

मासक्षमण की पूर्णाहुति कल

धर्मका अनुसरण कर भगतपुरी निवासी रीना दख ने मासक्षमण शुरू किया था। पूर्णाहुति 22 सितंबर को होगी। 21 सितंबर को गुजरात के संगीतकार त्रिलोक मोदी भजन पेश करेंगे। चंद्रवीर परिवार के लोकेश मेहता ने बताया 22 सितंबर सुबह 8.30 बजे शोभायात्रा निकलेगी। रीना हंसमुखलाल दख करेणीवाला की पुत्रवधू है।