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प्रसन्न होते हैं पितृदेव

7 वर्ष पहले
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श्राद्ध पक्ष में भागवत कथा से पितृदेव प्रसन्न होते हैं। जो कथा को सुनता है उसके चारों पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) पूर्ण होते हैं और जीवन में वात्सल्य बढ़ता है। यह बात शनिवार को चारभुजानाथ मंदिर धनजी भाई का नोहरा में आचार्य लोकेंद्र पुरोहित ने कही। उन्होंने पितृदेव का पूजन श्राद्ध का महत्व भी समझाया। कथा विश्राम रविवार को होगा। चल समारोह िनकलेगा।

हरिअनंत, हरि कथा अनंता-दीनदयालनगर मेंबाल हनुमान मंदिर की भागवत कथा में पं. प्रदीप शास्त्री वृंदावन वालों ने ईश्वर की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया 1008 मुख वाले भगवान शेषनाग भी हरि कथा का वर्णन नहीं कर सकते। भगवान श्रीकृष्ण को प्रणाम करने से क्लेश, शोक, पाप, दूर हो जाते हैं।

परलोकभी बिगड़ता है धन के दुरुपयोग से-मेहंदीकुई बालाजीमंिदर में पं. योगेश्वर शास्त्री ने कहा धन के दुरुपयोग से लोक-परलोक बिगड़ता है। अनीति से कमाया धन अलक्ष्मी है। महापौर शैलेंद्र डागा, भाजपा जिला महामंत्री प्रदीप उपाध्याय ने पूजन किया।

प्रेम के दो बोल चाहिए माता-पिता को

भक्तनकी बावड़ी मुक्तिधाम में भागवत कथा में शनिवार को पं. दिनेशकृष्ण शास्त्री ने कहा माता-पिता को अच्छा खाना-पीना या पहनने को नहीं चाहिए। उन्हें प्रेम के दो बोल चाहिए। भागवत कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग हुआ। नंद उत्सव मना। भागवत प्रचारक तेजकुमार सोलंकी ने भी संबोधित किया। सुरेंद्र जायसवाल, रामसिंह, मनोज प्रजापति, मोहन चौरसिया आदि शामिल हुए। कथा विश्राम मंगलवार को होगा।