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स्वाइन फ्लू : एक संदिग्ध की मौत, दो ने छोड़ िदया अस्पताल
अव्यवस्थाओं से घबरा कर भाग रहे मरीज
रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो - दोनोंमामलों में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज अस्पताल से जाने के बाद कहां गए, इसकी जानकारी विभाग के पास नहीं है। रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो उन तक पहुंचने में अधिकारियों को पसीना जाएगा। उनके कारण संक्रमण फैलने का खतरा भी रहेगा।
स्क्रीनिंगबंद-तीन दिनमे श्रेणी के 129 संदिग्ध सामने आने के बाद सोमवार से जिला अस्पताल में स्क्रीनिंग बंद कर दी गई। विभाग का मानना है कि इससे जनता में नकारात्मक संदेश जा रहा है।
चारसाल में छह की मौत -2010 सेअब तक जिले में स्वाइन फ्लू से 6 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे पहले 2010 में 3 मरीज पॉजिटिव निकले थे। इनमें से एक की मौत हो गई थी। 2012 में दो मरीज पॉजिटिव निकले। इनमें से एक की मौत हो गई। 2013 में 6 पॉजिटिव मरीज सामने आए थे। इनमें से 4 की मौत हो गई।
कर्मचारीअसुरक्षित-स्वाइन फ्लूवार्ड में सेवा दे रहे कर्मचारी भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्हें पीपीई किट दी और एन- 95 मास्क। वे साधारण मास्क लगाकर काम कर रहे हैं।
पर्याप्तव्यवस्थाएं हैं- नोडलअधिकारी स्वाइन फ्लू-डॉ. गौड़ ने बताया विभाग सजग है। मरीज अव्यवस्थाओं से नहीं बल्कि अधिक लोगों के पूछताछ करने से गए हैं। पीपीई किट और अन्य बचाव के साधन कर्मचारियों को दे रखे हैं। सर्दी-जुकाम के मरीजों की जांच की जा रही है। उन्हें कैटेगरी में रखने से जनता में डर फैल रहा था।
इनकी नहीं कोई जानकारी
उदाहरण1- उज्जैननिवासी 65 वर्षीय महिला को शनिवार दोपहर स्वाइन फ्लू वार्ड में भर्ती कराया था। शाम को स्वाब नमूना लिया। रात 10 बजे परिजन अच्छे अस्पताल में इलाज कराने का कहकर ले गए।
उदाहरण2- अमलेटीकी 19 वर्षीय युवती को बी कैटेगरी में संदिग्ध मानते हुए स्वाइन फ्लू वार्ड में भर्ती कराया। नमूना लेने के कुछ ही देर बाद परिजन उसे ले गए।