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जलसंकट देने लगा दस्तक

7 वर्ष पहले
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रतलाम। दिसंबर का एक पखवाड़ा ही गुजरा है और जलसंकट ने दस्तक दे दी। कई गांवों में आधे से ज्यादा नलकूप सूख गए। जो चल रहे हैं उनमें भी थोड़ा ही पानी है। जनवरी के अंत तक जलसंकट गहरा सकता है। जिले में जलसंकट गहराने की मुख्य वजह कम बारिश होना है। जिले की सामान्य बारिश 35.2 इंच है लेकिन इस बार 23 इंच बारिश ही हुई। 70 फीसदी तालाब भी पूरे नहीं भर पाए। जो भरे थे वे भी खाली हो गए। समय से पहले नलकूपों का उपयोग शुरू हो गया। इससे वो सूखने लगे हैं। कई गांवों में आधे से ज्यादा नलकूप सूख गए हैं। सिंचाई के साथ अब पीने के पानी की समस्या भी आने लगी है। ऐसे में जनवरी से पानी के लिए मारामारी मच सकती है।

लहसुननहीं बोई-शिवपुर केभेरूलाल सोलंकी ने बताया बारिश की कमी के चलते इस बार लहसुन नहीं बोई। इसके बाद भी नलकूप अभी से सूख गया। रामपुरिया के भरत राठौर ने बताया हर साल दिसंबर में नलकूपों में प्रेशर से पानी आता है। इस बार स्थिति उलटी है। ये अभी से सूख गया जबकि बारिश में अभी 6 महीने बाकी हैं। पशुओं को पानी पिलाने की भी समस्या आएगी। इटावाखुर्द के सुखदेव कुमावत ने बताया नलकूप खनन पर पाबंदी लगना चाहिए। सिर्फ सरकारी नलकूप खनन को ही अनुमति मिलना चाहिए। पाबंदी नहीं लगती है तो गांवों में लोगों को पानी भी नसीब नहीं होगा।

मितव्ययता से हो इस्तेमाल

भूजल सर्वेक्षण इकाई के सहायक भू-जलविद जयंत मूले ने बताया जिले में जलस्तर तेजी से गिर रहा है। ऐसे में अभी से पानी की बचत करनी होगी। सभी को मिलकर कदम उठाना होंगे। नहीं तो आगे स्थिति और भयावह हो जाएगी।

कहां क्या स्थिति

गांव नलकूप बंद

दंतोड़िया150 100

नौगांवा 250 125

शिवपुर 2000 1500

रामपुरिया 200 100

चितावद 200 150

ईटावाखुर्द 250 75

लूनेरा 250 50

चौराना 100 50

(नोट- जानकारी ग्रामीणों से चर्चा के अनुसार है।)