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धन ही सबकुछ नहीं

7 वर्ष पहले
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रतलाम | जीवनमें धन वैभव ही सबकुछ नहीं है। प्रेम नहीं है तो धन-वैभव बिना नमक की रोटी की तरह स्वादहीन है। धन ने मानवीय श्रम का मूल्य कम कर दिया है। उसके साथ श्रम में छुपा प्रेम भी अब दुर्लभ हो गया। पोरवाड़ों का वास स्थित आराधना भवन में रविवार को भव्यकल्पाश्रीजी ने प्रवचन में ये बात कही।

नाटककल-सीमा लूनियाने बताया श्री पाश्वर्नाथ भगवान के जन्मकल्याणक महोत्सव के तहत तीन दिनी कार्यक्रम हुए। बालिका मंडल 16 दिसंबर को दोपहर 1 बजे नृत्य नाटक की प्रस्तुति देगा।