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73 टन यूरिया भी कम पड़ गया

7 वर्ष पहले
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दो घंटे में खत्म हो गया एक ट्रक यूरिया

मंडीमें बंटा 73 टन यूरिया ऊंट के मुंह में जीरा के समान साबित हुआ। मंगलवार को कृषि उपज मंडी स्थित एमपी एग्रो के गोदाम के बाहर किसान दिनभर कतार में लगे रहे। बावजूद कई को यूरिया नहीं मिला। जिन्हें मिला तो वो भी नाममात्र का। किसानों को दो-पांच बोरी में ही संतोष करना पड़ा जबकि जरूरत 10 से 15 बाेरी की थी।

सोमवार से यूरिया की बिक्री शुरू हो गई थी। मंगलवार को भी सुबह से ही कृषि उपज मंडी स्थित एग्रो गोदाम के बाहर किसानों की लंबी कतार लगी। एमपी एग्रो ने दोपहर तक 73 टन यूरिया बांटने का दावा किया। इसके बाद भी कई कतार में लगे 200 किसानों को बिना खाद लौटना पड़ा। आगे कब आएगा इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

10बजे गए थे -घटलासे आए मेहमूद खान ने बताया सुबह 10.30 बजे से कतार में थे। दोपहर 3.30 बजे कर्मचारियों ने कहा खाद नहीं बचा। सेजावता के नानालाल ने बताया उन्हें 8 बोरी यूरिया की जरूरत है। यहां पर दो-दो बोरी दी जा रही है। चिकलिया के हरीशकुमार जाट ने बताया अभी यूरिया की जरूरत है। कर्मचारी कह रहे हैं कि जब रैक आएगा तभी मिल सकेगा। अभी पानी और बिजली दोनों हैं। कुछ दिन में पानी का लेवल नीचे चला जाएगा। इसके बाद तो कोई मतलब ही नहीं।

देनाहोंगे 400 रुपए- सरकारीकोलवाखेड़ी के आत्माराम खराड़े ने बताया यहां एक बोरी का दाम 287.50 रुपए है। ओपन मार्केट में 400 रुपए में मिल रहा है।

सहीआंकड़ा भी नहीं पता-मंडी मेंएमपी एग्रो के केंद्र से कितना यूरिया बंट चुका है, इसका भी सही आंकड़ा नहीं है। एग्रो के जिला प्रबंधक डी.एस. पाटीदार ने बताया हमें 73 टन यूरिया मिला था जो हमने बांट दिया। 1200 और 260 बोरी में अलग-अलग आया था। एमपी एग्रो के गोदाम इंचार्ज का कहना है सोमवार शाम ही हमें 1200 बोरी मिली थी। पहले पांच-पांच फिर तीन-तीन और बाद में दो-दो बाेरी दिया। दो दिन में कुल 60 टन यूरिया बांटा है।

कहांजा रहा यूरिया- पिछलेसाल जिले में 2 लाख हेक्टेयर जमीन में बोवनी हुई थी। तब सरकारी दुकानों से 17516 टन से ही पूर्ति हो गई थी। इस बार अभी तक 1.65 लाख हेक्टेयर जमीन में बोवनी हुई। इसके लिए 11 हजार टन यूरिया चुका है। इसके बाद भी किल्लत है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि यूरिया जा कहां रहा है।

नहीं होगी परेशानी

^इसबार बारिश कम हुई है। पानी की कमी है इसलिए यूरिया भी खेतों म