रतलाम। गुर्जर समाज के सामूहिक विवाह में 13 साल में पहली बार 48 जोड़ों ने एक साथ 7 फेरे लिए। सामूहिक विवाह रविवार को तीतरी में हुआ। समाज ने 13 साल पहले सामूहिक विवाह की शुरुआत की। तब 7 जोड़े थे। पिछले साल 27 जोड़ों का सामूहिक विवाह हुआ।
सामूहिक विवाह की शुरुआत सुबह भगवान श्री देवनारायणजी की आरती से हुई। तोरण, वरमाला के बाद जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। दोपहर में जोड़ों को समिति ने विदाई दी। विवाह में रतलाम के अलावा प्रतागपढ़, निम्बाहेड़ा, कालीगांव, कलमोड़ा, तीतरी, नीमच, अकोला, सेमलिया, नौगांवा, सैलाना, कनेरी आदि के समाजजन शामिल हुए।
फिजूल खर्ची रोकने की पहल- मोहनलाल भाई ने बताया समाज आर्थिक रूप से पिछड़ा है। फिजूलखर्ची रोकने के उद्देश्य से 13 साल पहले सामूहिक विवाह की शुरुआत की थी। समाजजन अब जागरूक होने लगे हैं। इससे जोड़ों की संख्या बढ़ने लगी है।
एकजुटता का आह्वान : श्रीदेव सामूहिक विवाह गुर्जर समाज समिति ने समाजजन से आगे भी सामूहिक विवाह सहित अन्य कार्यक्रम में भाग लेने के साथ एकजुटता का संकल्प दिलाया।
दिनेश वर्मा, बगदीराम धभाई, मोहनलाल धभाई, राजकुमार गुर्जर, मदनलाल गुर्जर, मोहनलाल धभाई, देवेंद्र गुर्जर, मुरलीधर गुर्जर, संतोष गुर्जर, रामस्वरूप गुर्जर आदि मौजूद थे। सामूहिक विवाह में समाज के सभी लोगों ने सहयोग दिया।