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सर्वांगकाया कल्पासन

6 वर्ष पहले
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अंत: शरीर शुद्धिकरण और निरोगी काया स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी है। सर्वांगकाया कल्पासन काया को निर्मल तथा ऊर्जावान बनाने में विशेष स्थान रखता है।

विधि-स्वच्छकंबल चादर पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों हाथ जमीन पर कमर के अगल-बगल रखें। घुटनों को सीधा रखते हुए दोनों पैरों को ऊपर इतना उठाएं की कमर पेट लगभग समकोण बन जाएं। हथेलियों को कमर पर लगाएं और कमर को हाथों के सहारे इतना उठाएं कि ठुड्डी सीने को छूने लगे। इसी तरह पैर ऊपर रखकर पद्मासन लगाएं। दाहिने पैर जंघा पर बायां पैर दाई जंघा पर रखें घुटनों को ऊपर की ओर उठाएं। यह आकृति कमल के समान बन जाएगी।

खासक्रम-आसनकरते समय और वापस आते समय अंत कुंभक करें एवं पूर्ण आसन पर स्वाभाविक सांस चलने दें।

समय-1से 5 मिनट तक कर सकते हैं। अभ्यास हो जाने पर समय बढ़ाएं।

लाभ-इसआसन को करने पर रक्त की मात्रा बढ़ जाने से ग्रंथि की कार्यक्षमता बढ़ जाती है। जिससे स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

2.मूलरूप से इस आसन का प्रभाव थायरॉइड ग्रंथि, मेरूदंड, हृदय एवं पैरों से संबंधित रोगों पर पड़ता है।

3.बालोंका झड़ना रोकता है, चेहरे को साफ चमकदार बनाता है।

4.कामशक्तिकोव्यवस्थित कर काम-विकार का शमन करता है।

5.शीर्षासनसे मिलने वाले लाभ भी इस आसन से मिल जाते है।

विशेषलाभ- 1-जिनकी बुद्धि हमेशा भ्रमित रहती है,काम करने में मन नहीं लगता उन्हें यह आसन तीन महीने तक कम से कम 5 मिनट करना चाहिए।

2.मिर्गीऔर कमजोर मस्तिष्क वालों के लिए यह आसन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

3.मासिकधर्म संबंधी बीमारियां ठीक करता है।

4.नेत्रज्योति, निम्न रक्तचाप, पाचन-संस्थान, रक्त विकार रोगों के लिए यह महत्त्वपूर्ण आसन है।

नोट-सर्वाइकल,स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिप डिस्क एवं यकृत के विकार वाले इस आसन को करें।

उच्च रक्तचाप,हृदय संबंधी बीमारी वाले साधक, किसी योग्य विशेषज्ञ के निर्देशन में ही करें।

श्रीमतीआशा दुबे, महामंत्री,भारत स्वाभिमान ट्रस्ट रतलाम