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आत्म उद्धार के लिए है मनुष्य जीवन

7 वर्ष पहले
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मनुष्यजीवन क्यों मिला, इसकी खोज सभी को करना चाहिए। आत्म उद्धार के लिए ही यह जीवन मिला है। मन को एकाग्र रखते हुए परमात्मा की भक्ति करना चाहिए तभी मोक्ष का मार्ग खुल सकता है। भागवत कथा का श्रवण परमात्मा को प्राप्त करने का एक सहारा है। यह बात योगेश्वरशास्त्री ने रविवार को मेहंदीकुई बालाजी मंदिर हॉल में भागवत कथा में कही। उन्होंने कहा माया के स्पर्श से दूर रहने पर ही मनमोहन की सेवा हो सकती है। मन में अनेकों जन्मों का मेल है जिसे बाहर निकालने के लिए आत्मशुद्धि जरूरी है। श्रीमदभागवत कथा के श्रवण से मन आत्मा शुद्ध हो जाती है। जो व्यक्ति भागवत का आश्रय लेता है वह भगवान का प्रिय हो जाता है। भागवत साक्षात नारायण का स्वरूप है। रोज दोपहर 12 से 4 बजे तक कथा हो रही है। इसमें पितृ मोक्ष के लिए लोग संकल्प भी करते हैं। कथा विश्राम के बाद आरती प्रसाद वितरण किया गया।

उपस्थित श्रद्धालु। इनसेट-प्रवचन देते योगेश्वर शास्त्री।