माता-पिता और भाई-बहन हैं पेड़
िजतेंद्र श्रीवास्तव | रतलाम
एकगांव में लगे पेड़-पौधे किसी के माता-पिता हैं तो किसी के भाई-बहन। इन्हें परिजनों की याद में लगाया है, रिश्ता भी इनसे उसी तरह निभाया जा रहा है।
ये अनूठा गांव है करमदी। परिजन के निधन पर यहां पौधे लगाए जाते हैं। परिजन की तरह ही इनकी देखभाल की जाती है। दु:ख-बीमारी के वक्त इनसे प्रार्थना की जाती है। राखी, दीपावली, होली या अन्य त्योहार पर भी इन्हीं पेड़-पौधों के साथ मनाया जाता है। यह परंपरा 2006 में शुरू हुई थी। आज यहां 50 हरे-भरे पेड़ हैं।
छोटी-सीशुरुआत बड़ा अभियान- परिजनके निधन के बाद उन्हें अपने बीच रखने के लिए आमतौर पर स्मारक बनाए जाते हैं। करमदी विकास समिति ने निर्णय लिया पेड़ से बेहतर स्मारक दूसरा नहीं हो सकता। इसमें जीवन है, इनसे बातें कर सकते हैं और अपने सामने इन्हें फलता-फूलता भी देख सकते हैं। पर्यावरण भी सुधरता है। विकास समिति की छोटी-सी शुरुआत बड़ा अभियान बन गई। गांव में किसी परिवार में निधन होने पर समिति सदस्य उनके यहां पहुंचते हैं और उनसे औषधीय पौधा लगाने की गुजारिश करते हैं। पौधा भी समिति मुहैया कराती है। समिति के जितेंद्र राव, सोहन पाटीदार, धर्मेंद्र सोलंकी, कमलेश सोलंकी, प्रहलाद पाटीदार, बबलू पाटीदार, कन्हैयालाल डोडियार, अंबालाल मईडा, पीरूलाल खराड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शेष|पेज9 पर
चार साल पहले 11 साल के बेटे मदन के निधन पर पिता कैलाश पाटीदार ने चंदन का पौधा लगाया। दो दिन बाद मंगलवार को उनका ऑपरेशन है। परिवार के लोग अब बेटे (पेड़) से ऑपरेशन सफल होने की कामना कर रहे हैं। भाई घनश्याम पाटीदार, बहन रेखा ने बताया यह हमारा भाई है।
ऑपरेशन सफल होने की कामना