- मोबाइल, जूते, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक आइटम खरीद रहे हैं।रतलाम। शहर में 20 फीसदी खरीदारी अब ऑनलाइन की जा रही है। चौंकाने वाला ये आंकड़ा भास्कर को बाजार के सर्वे में मिला। ऑनलाइन खरीदी से इलेक्ट्रॉनिक, मोबाइल और रेडीमेड कारोबार पर खासा असर पड़ा है।
शहर में ऑनलाइन बुक प्रोडक्ट की डिलीवरी दो कोरियर कंपनियां कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक ऑनलाइन कंपनियों के रोज औसतन 300 या इससे अधिक आइटम की डिलीवरी कंपनियों को मिल रही है। एक साल पहले तक 50 पैकेट भी डिलीवर नहीं होते थे। इनमें कपड़े, जूते, मोबाइल सहित अन्य आइटम शामिल हैं।
डीटीडीसी कोरियर की मंजू भटेवरा ने बताया ऑनलाइन प्रोडक्ट कंपनी के जरिये आते हैं। हमारा काम इन्हें लोगों के घर तक समय पर पहुंचाना है। पहले की तुलना में अब प्रोडक्ट ज्यादा रहे हैं। ब्ल्यू डॉट कंपनी के मुताबिक जो भी प्रोडक्ट आते हैं, उन्हें उसी समय लोगों के घर पहुंचा देते हैं। एक साल में संख्या बढ़ी है।
मार्केटमें चिंता, बिजनेस में ग्रोथ थमी- रूपायनस्टोर्स के रवि गुप्ता ने बताया हर मिनट और हर घंटे डिस्काउंट मिलने के कारण ग्राहक ऑनलाइन खरीदी की तरफ जा रहा है। काउंटर से खरीदी हो रही है लेकिन ग्रोथ नहीं है। यही स्थिति रही तो आगे दिक्कत सकती है। रामदयाल ब्रदर्स के आशु कल्याणी ने बताया हम जो वस्तुएं बेच रहे हैं उस पर 13 फीसदी वैट लग रहा है। ऑनलाइन बाजार में सीधे वस्तुएं रही हैं। इससे ये सस्ती होती हैं। 20 फीसदी तक कारोबार प्रभावित हुआ।
इसलिए बढ़ा रुझान : - ब्रांडेडआइटम, भारी भरकम डिस्काउंट और तुरंत डिलेवरी। {पसंदीदा आइटम के लिए बाजार में भटकने की जरूरत नहीं।
- बाजार में एमआरपी पर बिजनेस, ऑनलाइन में 70 फीसदी तक डिस्काउंट। {प्रोडक्ट घर आने के बाद भुगतान।
- वापसी की सुविधा।
ये हैं 5 पसंदीदा शॉपिंग साइट्स:-
- मंत्रा डॉटकॉम
- फ्लिपकार्ट डॉटकॉम
- जबांग डॉटकॉम
- स्नैपडीलडॉट कॉम
इनका ध्यान रखें
- प्रोडक्ट खरीदने से पहले ऑनलाइन कंपेयर करें।
- सोशल नेटवर्किंग साइटों पर ऑनलाइन साइटें ऑफर पोस्ट करती हैं। इन साइटों पर नजर रखें ताकि सस्ती डील मिले।
- क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैकिंग से भुगतान पर हर खरीदी पर पॉइंट्स मिलते हैं। इन्हें रिवॉर्ड पॉइंट्स कहते हैं। इनसे अगली खरीदी में छूट मिलती है।
सावधानी जरूरी: - डिलेवरीचार्ज पहले पता कर लें। कई बार ऐसा होता है सामान की कीमत के बराबर डिलेवरी चार्ज बन जाता है।
- डिलीवरी के दौरान टूट-फूट होने पर रिटर्न होने की जानकारी पहले जुटा लें।
- गारंटी सर्विस कौन देगा। सर्विस सेंटर नहीं होने से प्रोडक्ट बाहर भेजना पड़ता है। इससे दो-तीन महीने लगते हैं।