रतलाम। सेंव की तरह मावे ने भी रतलाम को पहचान दिलाई है। इसके पीछे मेहनत है जिले के करीब 400 किसानों की। जो सुबह 7.00 बजे से काम पर लग जाते हैं। मावा इनके लिए गृह उद्योग की तरह है। मावा उत्पादन ने इनका जीवन भी बदल दिया है। बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ते हैं। पक्के घरों में सुख-सुविधा के हर साधन हैं।
जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर है बरबोदना। सुबह 7 बजे से यहां भट्ठियां चालू हो जाती हैं। तीन पीढ़ी से मावा उत्पादक जाट परिवार के लाला जाट के अनुसार गांव में मावे की 5 भट्ठी कन्हैयालाल पाटीदार, मुकेश जाट, भंवरलाल जाट, मांगीलाल जाट मुन्नालाल जाट की हैं। यहां बरबोदना सहित आसपास के गांवों के करीब 400 किसानों का 1600 लीटर दूध रोज आता है। 11 बजे तक मावा बनता है। इसके बाद सप्लाई होती है। रोज 4 से 5 क्विंटल मावा शहर अन्य जगहों पर भेजते हैं।
मुनाफा भी ज्यादा- लालाजाट बताते हैं मेहनत के साथ कमाई अच्छी है। अन्य काम की तुलना में मुनाफा ज्यादा है। किसान नेता डी.पी. धाकड़ ने बताया शुद्ध मावे से गांव में संपन्नता आई है। किसान आत्मनिर्भर हुए हैं।
ईमानदारी और लगन से टिका विश्वास : उंडवा,भैंसा डाबर, बोदीना, धौंसवास, ग्वालखेड़ी, मोरदा, रिंगनिया, रघुनाथगढ़, गुणावद, बरबोदना, सेमलिया, नामली, बांगरोद, नापाखेड़ी, धमोत्तर, बामनखेड़ी, गोठड़ा सहित आसपास के गांव के 400 से ज्यादा किसान मावा उत्पादन में लगे हैं। मुन्नालाल जाट बताते हैं तरह-तरह की किस्म का मावा हम बनाते हैं। ईमानदारी से काम करते हैं, इसीलिए रतलाम की साख बनी हुई है।
भाप से तैयार होता है मावा : बरबोदना सहित आसपास के गांवों में मावा तैयार करने में किसानों ने आधुनिक तरीके का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। बायलर युक्त भट्टी में पानी गर्म होकर कढ़ाव तक पहुंचता है। गर्म पानी की भाप से कढ़ाव में दूध उबलता है और मावा तैयार होता है। इन भटि्टयों पर दो घंटे में 100 किलो मावा तैयार होता है। खर्च भी बेहद कम आता है।
इसलिए खास है रतलाम का मावा : दूध का उत्पादन ज्यादा, खपत कम है। करीब 4 लीटर दूध में 1 किलो मावा बनता है। जो घीदार नरम होता है। शुद्धता की वजह से दाम अधिक होते हैं। अन्य जिलों में जब मावे के दाम 100 रु. हो जाते हैं तब भी रतलाम में मावे का भाव 180-190 रु. प्रति किलो रहता है। अन्य जिलों में मावे से घी निकाल कर उसमें चिकनाई के लिए वनस्पति घी मिला दिया जाता है। इससे क्वालिटी खत्म हो जाती है और भाव कम हो जाते हैं।
रतलाम में मावे की वैरायटी : - पीला गाय के दूध से बनता है। 10 से 20 रुपए ज्यादा भाव। गुलाब जामुन, मावा बाटी में उपयोग।
- दानेदार सफेद मावा बनाते वक्त दूध में थोड़ी-सी फिटकरी डालते हैं। यह खोपरा पाक, गाजर का हलवा लड्डू में उपयोगी।
- चिकनाई युक्त ये बर्फी का मावा है। दूध को बिना किसी प्रयोग से सामान्य आंच पर गर्म करने से तैयार होता है।