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ज्यादा राजस्व रतलाम से, कमिश्नरेट ग्वालियर में
सेंट्रलएक्साइज विभाग रतलाम का कमिश्नरेट इंदौर के ग्वालियर को बनाने की तैयारी की जा रही है। जिस नए कमिश्नरेट में रतलाम को शामिल किया जा रहा है उसमें सबसे ज्यादा राजस्व रतलाम का ही है। इसके बाद भी रतलाम में कमिश्नरेट कार्यालय नहीं बनाया जा रहा। इससे उद्योगपति चिंतित हैं।
अभी केंद्रीय सीमा एवं उत्पाद शुल्क विभाग का कमिश्नरेट कार्यालय इंदौर है। ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, डबरा, रतलाम, मंदसौर, नीमच और उज्जैन को मिलाकर कमिश्नरेट ग्वालियर में बनाने की तैयारी की जा रही है। इसका प्रस्ताव तैयार हो गया है। ग्वालियर में भवन ढूंढा जा रहा है। भवन मिलते ही यह चालू कर दिया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो सबसे ज्यादा राजस्व चुकाने वाले जिले के उद्योगपतियों को छोटे-छोटे कामों के लिए ग्वालियर जाना पड़ेगा। दूरी ज्यादा से परेशानी तो होगी ही साथ ही समय भी लगेगा।
नए कमिश्नरेट से ये होगी परेशानी
>इंदौर 125 किमी दूर है जबकि ग्वालियर 600 किमी। सीधी ट्रेन और बस नहीं है। इससे आने-जाने में दिक्कत होगी। समय भी लगेगा।
>सुरक्षा की दृष्टि से ग्वालियर को सही नहीं माना जाता। इससे उद्योगपतियों के मन में भी डर रहेगा।
शहरों का राजस्व एक नजर में
1. रतलाम रेंज- 360 करोड़ रुपए
>एक्साइज- 288 करोड़ रुपए
> सर्विस टैक्स- 45 करोड़ रुपए
> कंटेनर डिपो 27 करोड़ रुपए
(नोट- रतलाम, मंदसौर, नीमच, जावरा, नागदा मिलाकर रतलाम रेंज का राजस्व है)
2.ग्वालियर- 303 करोड़ रुपए
>एक्साइज- 210 करोड़ रुपए
> मालनपुरा कंटेनर डिपो- 35 करोड़ रुपए
> सर्विस टैक्स- 58 करोड़ रुपए
(नोट- ग्वालियर, शिवपुरी, गुना और डबरा को मिलाकर राजस्व है)
3.उज्जैन- 81 करोड़ रुपए
>एक्साइज- 41 करोड़ रुपए
>सर्विस टैक्स- 40 करोड़ रुपए