रतलाम | राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना मजाक बन गई है। बीमा कंपनी ने अतिवृष्टि से चौपट फसल का जो मुआवजा तय किया है, वह लागत का एक फीसदी भी नहीं है। किसानों को एक बीघे फसल का मुआवजा 6.30 रुपए दिया गया है। जबकि इतने में 200 ग्राम सोयाबीन भी नहीं आती। ऐसा जिले के सैकड़ों किसानों के साथ हुआ है। पिछले साल अतिवृष्टि से कई गांवों में फसल चौपट हो गई थी। इसकी भरपाई के लिए एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ने जिले के लिए 14.69 करोड़ रुपए मुआवजा जारी किया है।
राशि करोड़ों में है लेकिन कई किसान के हिस्से 10 रुपए भी नहीं रहे। कई किसानों की हजारों रुपए की फसल के नुकसान का मुआवजा सिर्फ 6.30 रु. आंका गया है। किसानों के अनुसार 1 किलो सोयाबीन की कीमत करीब 40 रुपए है। इस हिसाब से मुआवजे की राशि से सिर्फ 158 ग्राम सोयाबीन ही खरीदी जा सकती है।
एक बीघे पर खर्च
हंकाई 500रु.
बीज 1200रु.
बुआई 200रु.
खाद 850रु.
कीटनाशक 2000रु.
कटाई 1000रु.
(नोट- जानकारी किसानों से चर्चा अनुसार)
मुआवजे की बानगी
किसान नुकसान मुआवजा
गीताबाईधाकड़ (ईशरथुनी) 21 बीघ 132.40 रुपए।
रामेश्वर धाकड़ (ईशरथुनी) 16 बीघा 104 रुपए।
निर्भयसिंह चौहान (ईशरथुनी) 26 बीघा 167.08 रुपए।.
लालकुंवरबाई (प्रीतमनगर) 5 बीघा 263 रुपए।
सुगनबाई जाट (दंतोड़िया) 5 बीघा 92 रुपए।
बीमा कंपनी देती है मुआवजा : उपसंचालक कृषि सी. के. जैन ने बताया बीमा एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी करती है। मापदंड अनुसार कंपनी ही मुआवजा बांटती है।
नियमानुसार दिया मुआवजा : एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के राकेश कोरी ने बताया उत्पादन का एवरेज निकालकर मुआवजा दिया जाता है। जितना नुकसान होगा उतना ही तो मुआवजा देंगे।