सोयाबीन की फसल पर चूहों ने िकया अटैक
सोयाबीनबोने वाले किसानों को इन दिनों इल्लियों के साथ-साथ चूहों से भी दो-चार होना पड़ रहा है। चूहे सोयाबीन की अधपकी फलियां कुतर कर गिरा रहे हैं। चूहे मारने का उपाय भी कारगर नहीं हो रहा।
खेतों में बढ़ी चूहों की संख्या से क्षेत्र के कई गांवों के किसान परेशान हैं। मऊ के आसाराम पंवार, लीलाधर, ईश्वरलाल पाटीदार ने बताया हर खेत में सैकड़ों चूहे हैं। ये फलियां कुतर रहे हैं। फली में अभी ठीक से दाने आए भी नहीं हैं। धमनोद के जगदीश पाटीदार, चिकलिया के सुरेश जाट, उमरथना के बद्रीलाल पाटीदार ने बताया अगर चूहों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो 20 से 25 प्रतिशत फसल खराब हो जाएगी।
चूहामारने का उपाय बेअसर-चिकलिया केसुरेश जाट ने बताया कीटनाशक रखने के बाद भी चूहे नहीं मर रहे। खेतों के आसपास पानी या गिली मिट्टी रहती है। कीटनाशक खाने के बाद चूहे पानी पी लेते हैं अथवा गीली मिट्टी खा लेते हैं जिससे वे बच जाते हैं।
येगांव प्रभावित-मऊ, चिकलिया,सिमलावदा, विरमावल, बिलपांक, धामनोद, पंचेड़, सेमलिया, उमरथाना सहित कई गांव।
क्यों बढ़ी समस्या
{बारिशरुक-रुक कर हुई। तेज बारिश ज्यादा दिन होती तो चूहे पानी में यहां-वहां हो जाते। बिल खत्म हो जाते और संख्या भी नहीं बढ़ती।
{कीटनाशक के कारण सांप मेंढक खत्म हो गए। इससे भी चूहों की संख्या बढ़ गई।
पूरागांव एक साथ डाले कीटनाशक
कृषिउपसंचालक सीके जैन ने बताया चूहों के फसल कुतरने की शिकायतें कई गांवों से मिली हैं। इसका एक ही उपाय है कि पूरा गांव एकसाथ खेत में चूहा मार कीटनाशक डाले। जगह-जगह पिंजरे रखें और बिल बंद करें। ग्रामीणों को गर्मी में चूहा उन्मूलन अभियान चलाना चाहिए था। तब खेत खाली रहते हैं और चूहों को मारना भी आसान रहता है।
मऊ के आसाराम पंवार का कहना है चूहे फलियों का नुकसान कर रहे हैं। फोटो भास्कर