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श्रीशंखेश्वर पार्श्वनाथ एकासने आज से

7 वर्ष पहले
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भगवान की आराधना से कम होते हैं पाप

अभिग्रह पर आधारित प्रस्तुतियां

फुहारों में निकला तपस्वी का वरघोड़ा

फुहारोंके बीच मंगलवार को वरघोड़ा निकला। यह विभिन्न मार्गों से होता हुआ उपाश्रय पहुंचा। तपस्वी अंशुल पालरेचा का सम्मान किया। धर्मसभा में महासती गुणज्ञाश्रीजी पूर्णमालाश्रीजी ने कहा भौतिकता के दलदल में फंसा व्यक्ति बाहर निकल कर धर्म आराधना के मार्ग को अपना ले तो जीवन सार्थक हो जाता है। अंशुल ने तप के कठिन मार्ग को अपनाकर कर्मों की निर्जरा की और परिवार संघ के प्रेरणा स्रोत के रूप में उत्कृष्ट स्थान बनाया। महासती की निश्रा में अब तक 3 मासक्षमण हो चुके हैं। संघ अध्यक्ष कनकमल नाहर, रमेश चौरड़िया, अशोक मूणत, दीपक कोठारी, विमल कोठारी, पारसमल मांडोत, इंदरमल जैन, पारसमल, विवेक कोठारी, सतीश नाहर, नीलेश जैन, अमित खाबिया सहित समाजजन मौजूद थे।

26उपवास पूरे-36 उपवासकी तपस्या को संकल्पित मोनिका के 26 उपवास पूरे हुए। उनकी माता 41 उपवास कर चुकी हंै। पिता केसरीमल पालरेचा पर्युषण में उपाश्रय में रहकर आठ दिन उपवास करते हैं।

{31 उपवास को संकल्पित पूनमचंद पालरेचा की पुत्रवधू ज्योति बाला के मंगलवार को 26 उपवास पूरे हुए।

{अंशुल पालरेचा ने 31 उपवास की तपस्या पूरी की। कपड़ा व्यापारी मुन्नालाल पालरेचा ने बताया महासती के सान्निध्य में 17 अगस्त को पारणा होगा।

नाटक की प्रस्तुति देते श्रावक-श्राविका। {फोटो भास्कर

अंशुल पालरेचा

ज्योति पारलेचा

मोनिका पालरेचा

वरघोड़ा में शामिल समाजजन।