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ट्रेन ड्राइवर तनाव में, मां ने मांगा जवाब

7 वर्ष पहले
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रतलाम। अफसरों के अकारण परेशान करने से एक रेलवे ड्राइवर तनाव में गया। बेटे की हालत मां से नहीं देखी गई। उसने अफसरों से बेटे को प्रताड़ित करने पर जवाब मांगा। मानव अधिकार आयोग में भी शिकायत की। मामला उज्जैन में पदस्थ लोको पायलट उस्मान गनी का है।
उस्मान की मां हज्जनी हुरमत बी ने बताया उस्मान 27 जून को यात्री ट्रेन लेकर रतलाम जा रहा था। रास्ते में वरिष्ठ डीएसटीई फुट प्लेटिंग इंस्पेक्शन के लिए इंजिन में चढ़े। हुरमत बी का आरोप है वे इंजिन में मोबाइल पर जोर-जोर से बात कर रहे। वे उस्मान से पूछताछ करते रहे। उसने किसी बात का जवाब नहीं देते हुए सिर्फ ट्रेन चलाने पर ध्यान दिया और समय पर ट्रेन रतलाम पहुंचाई।

अकारण मेडिकल कराया : हुरमतबी का कहना है उस्मान की गलती नहीं मिलने पर वरिष्ठ डीएसटीई ने सीनियर डीईई परीक्षित मोहनपुरिया से शिकायत कर दी। उन्होंने चैकिंग के लिए 1 से 4 जुलाई तक लोको इंस्पेक्टर लगाए। सीटीसीसी उज्जैन को मौखिक आदेश देकर मेडिकल कराने के निर्देश दिए। 5 जुलाई को मेमो देकर रेलवे अस्पताल भेज दिया। उस्मान का वार्षिक मेडिकल 9 मई को हो चुका था। अत: डॉक्टर ने सक्षम अधिकारी के लिखित आदेश के बिना मेडिकल करने से इंकार कर दिया। मोहनपुरिया ने 7 जुलाई को फिर मेमो दिया। 11 जुलाई को वडोदरा में मेडिकल परीक्षण हुआ। जिसमें उस्मान फिट पाए गए। 12 जुलाई को उन्हें नौकरी पर ले लिया।

परेशान करने का कारण पूछा: हुरमतबी ने बेटे को परेशान करने का कारण पूछते हुए पत्र डीआरएम, रेल मंत्रालय मानव अधिकार आयोग को भेजा है। उन्होंने आशंका जताई है कि बेटे के खिलाफ झूठा प्रकरण बनाकर नौकरी से निकालने की साजिश रची जा सकती है।

सीनियर अधिकारी बोलने को तैयार नहीं - मामले में सीनियर डीईई ने बात करने से इंकार कर दिया। डीआरएम ल. वेंकटरमन का कहना है मामला उनकी जानकारी में नहीं है। अगर पत्र आया है तो वे जांच कराएंगी।

मेडिकल का नियम :
-90 दिन से ज्यादा अनधिकृत अनुपस्थिति।
- 90 दिन से ज्यादा स्वीकृत अवकाश।
- खतरे का सिग्नल पार करने पर।
- ऑन ड्यूटी नशे में पाए जाने पर।
- विभागीय पदोन्नति में।
- इस प्रकरण में ये स्थितियां नहीं थीं।
अधिकारियों पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप।

- मानव अधिकार आयोग से की शिकायत।