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डिप्टी डायरेक्टर के निर्देश 48 घंटे में हवा

7 वर्ष पहले
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जिलाअस्पताल में डॉक्टर को दिखाना हो, दवा लेना हो या फिर इंजेक्शन लगवाना हो हर जगह मरीजों की फजीहत हो रही है। अस्पताल प्रशासन अव्यवस्थाओं पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रहा है। डॉक्टर हों या कर्मचारी उन्हें तो वरिष्ठों की हिदायतों की भी परवाह नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. वीरेंद्रकुमार के दिए आदेश भी 48 घंटे में ही हवा हो गए।

स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. कुमार ने रविवार को जिला अस्पताल का दौरा किया था। उन्होंने अव्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे। बावजूद अब तक सुधार नहीं हुआ। मंगलवार को भी अव्यवस्थाएं नजर आईं। मरीजों को डॉक्टर से चैकअप कराने, दवा लेने और इंजेक्शन लगवाने के लिए मशक्कत करना पड़ी। इस दिन 650 मरीज ओपीडी में आए। काफी इंतजार के बाद स्वास्थ्य परीक्षण हो सका। एक कंपाउंडर होने से इंजेक्शन लगवाने के लिए इंतजार करना पड़ा। दवाई वितरण काउंटर पर भी कतार लगाना पड़ी। दवा लेने के लिए 568 मरीज काउंटर पर पहुंचे। यहां एक कर्मचारी होने से उन्हें काफी इंतजार करना पड़ा।

गर्भवतीमहिलाएं भी परेशान- प्रसूतिगृह के इंजेक्शन कक्ष में एक नर्स होने से गर्भवती महिलाएं परेशान होती रहीं। यहां 200 से ज्यादा महिलाएं रोजाना इंजेक्शन लगवाने आती हैं। नर्स किरण मेहता ने जल्दी ही अतिरिक्त नर्सों की व्यवस्था करने का कहा है।

26में से 22 पद खाली- जिलाअस्पताल में कंपाउंडर के 26 पद स्वीकृत हैं जिसमें से 22 पद रिक्त हैं। 4 कंपाउंडरों के भरोसे व्यवस्थाएं रहती हैं। ये भी ऑपरेशन अन्य कार्यों में लगे रहते हैं। ऐसे में ओपीडी का इंजेक्शन कक्ष सेवानिवृत्त कर्मचारी श्याम शर्मा के भरोसे ही रहता है। वे अकेले ही सैकड़ों मरीजों को इंजेक्शन लगाते हैं। इमरजेंसी आने पर पर समस्या होती है।

डिप्टी डायरेक्टर के निर्देश हवा

{डिस्चार्ज के समय जननी सुरक्षा योजना का चेक, जन्म प्रमाण-पत्र नहीं मिल रहे।

{ जननी एक्सप्रेस नहीं होने से मरीजों को निजी साधन से घर जाना पड़ रहा है।

{ अस्पताल में जगह-जगह नियमों की जानकारी के पर्चे नहीं लग सके हैं।

{ जननी के चेक लेने के लिए प्रसूताएं मंगलवार को भी गलियारे में बैठी रहीं।

ये हैं अव्यवस्थाएं

{ओपीडी की पर्ची के लिए पर्याप्त कम्प्यूटर नहीं हैं। काउंटर पर मरीजों की कतार लगी रहती है।

{ ओपीडी में मरीजों की संख्या के मान से