आज होगा 1008वां पारणा
राजेशमुनिजी 9 साल से कर रहे हैं अभिग्रह, इतनी लंबी साधना करने वाले पहले संत
अभिग्रह व्रत करने वाले जैन संत राजेश मुनिजी की तपस्या से रविवार को रतलाम का नाम इतिहास में दर्ज होगा। मुनिश्री की 9 साल से चल रही अभिग्रह तपस्या में एक हजारवां पारणा रविवार सुबह होगा। इतनी लंबी अभिग्रह साधना करने वाले राजेशमुनिजी पहले संत हैं। 1008वां अभिग्रह अंकों के महत्व के कारण बेहद शुभ है। इसलिए जैन समाज के लोग धर्मलाभ के लिए एकत्रित होंगे। सुबह साढे 6 बजे मुनिश्री अभिग्रह के लिए निकलेंगे। अभिग्रह पूरे होने पर वे पारणा करेंगे। सुबह 8.45 बजे मोहन टॉकीज पर मुनिश्री के प्रवचन 11 बजे से हनुमान रुंडी पर सामूहिक एकासने का आयोजन होगा। इसमें 3 हजार से अधिक श्रावक-श्राविकाएं शामिल होंगे। चातुर्मास मेें तप-आराधना करने वाले तपस्वियों का बहुमान भी किया जाएगा।
येहै अभिग्रह तपस्या -मुनिश्री दोदिन जैन प्रक्रिया के अनुसार उपवास करते हैं। तीसरे दिन वे कुछ अभिग्रह यानि संकल्प कागज पर लिखकर निकलते हैं। संकल्प पूरा होने पर ही वे पारणा कर कुछ ग्रहण करते हैं। 2013 में महाराष्ट्र के कोपल गांव में उन्होंने 100 संकल्प लिए थे और वे सभी पूरे हुए। रविवार को 1008वां अभिग्रह बेहद शुभ है इसलिए जैन समाज के लोग शामिल होने के लिए उत्साहित हैं।
संकल्प होता है पूरा
श्रीसंघअध्यक्ष आजादकुमार मेहता, प्रचार सचिव अरविंद मेहता, प्रकाश मूणत, रखब चत्तर ने बताया मुनिश्री के सभी संकल्प पूरे होते हैं। 7 फरवरी 2001 को आचार्य प्रवर पूज्य श्री उमेशमुनिजी मसा अणु के मुखारविंद से गुप्त दीक्षा ली थी। बचपन से ही विलक्षण आध्यात्मिक प्रतिभा के धनी रहे मुनिश्री 9 वर्ष की उम्र से चौविहार तपस्या कर रहे हैं। कॉलेज में पढ़ाई के साथ वर्षीतप भी किए। पिता का साया 8 वर्ष की उम्र में उठ जाने के बाद दादाजी बाबूलालजी काकल्या माताजी पारसदेवी काकल्या ने लालन-पालन किया। 15 वर्ष की आयु से अपने परिवार की संभाल की ओर कभी भी पिताजी की कमी महसूस नहीं होने दी।
मुनिश्री के चित्रों का प्रदर्शन करते समाजजन।
चौबीसी में शामिल जैन समाज की महिलाएं। फोटो भास्कर