हर साल 15 लाख रुपए खर्च, नतीजा सिफर
आवारा पशु पकड़ने में निगम नाकाम है। सालाना 15 लाख रुपए खर्च करने के बाद भी शहर को आवारा पशुओं से मुक्त नहीं हो पाया है। पशुओं के कारण रोज हादसे हो रहे हैं।
शहर में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां आवारा पशुओं का जमघट रहता हो। इन्हें पकड़ने के लिए निगम में अलग से विभाग है। इसमें दरोगा सहित 16 कर्मचारी शामिल हैं। इनके वेतन और वाहन आदि पर सालाना करीब 15 लाख रुपए खर्च होते हैं। बावजूद सड़कों पर पशु कम होने का नाम नहीं ले रहे। इनमें से कई तो पालतू पशु हैं। निगम के जिम्मेदारों का तर्क है जब भी पशु पकड़ते हैं तो राजनीतिक दबाव के कारण उन्हें छोड़ना पड़ता है। पशुओं के सड़क पर जमावड़े के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और लोग घायल हो रहे हैं।
येहै हल-लोगों कासुझाव है कि निगम को बैठक वसूली की तरह पशु पकड़ने का भी ठेका दे देना चाहिए। इससे पालतू पशु पकड़े जाने पर ठेका लेने वाले और निगम को राजस्व प्राप्त होगा। महापौर शैलेंद्र डागा ने बताया जनता ने पशु पकड़ने का ठेका देने का सुझाव दिया है। इस तरह का सुझाव आया है। इस पर विचार कर रहे हैं। सभी से चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।