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कड़ाके की ठंड में फर्श पर हो रहा बच्चों का इलाज
बालचिकित्सालय में बच्चों को कड़ाके की ठंड में फर्श पर ही इलाज दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति मौसम परिवर्तन के बढ़ी मरीजों की संख्या अस्पताल में पलंग खाली नहीं होने से बन रही है। इससे नन्हे मरीज उनके परिजन को परेशान होना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन भी बेबस है।
मौसम में परिवर्तन आया है। कुछ दिन से रात का तापमान 13 डिग्री के आसपास है। इससे नन्हे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। बढ़ी मरीजों की संख्या से अस्पताल की व्यवस्थाएं भी गड़बड़ा रही हैं। पलंग कम पड़ने से बच्चों को फर्श पर लेटाकर इलाज देना पड़ रहा है। गंभीर बीमार बच्चों को भी रात में खुली हवा में बॉटल लगाकर छोड़ दिया जाता है। इससे बच्चे और उनके परिजन ठिठुरते रहते हैं। बुधवार सुबह एक दर्जन से ज्यादा बच्चे सीमेंट की पट्टी पर ही लेटे थे। इनमें कई का दो दिन से इसी हालत में इलाज किया जा रहा था।
रुणजी निवासी अमरी गरवार पांच साल के बेटे दिलीप को मंगलवार दोपहर 1 बजे बाल चिकित्सालय लाई थीं। उन्होंने बताया पलंग मिलने पर सीमेंट की पट्टी पर लेटाकर इलाज कराना पड़ रहा है। पूरी रात एक चद्दर में निकाल दी। यहां से कंबल तक नहीं मिला। विरियाखेड़ी के रमेश आदिवासी ने बताया बच्चे को पीलिया आर पेटदर्द है। रात में ठंड लगने पर बाहर से किराये का गद्दा-पल्ली लाना पड़े।
खुलेमें ही चढ़ाया खून-थैलेसीमिया पीड़ितनामली के 10 वर्षीय कृष्णा सोलंकी को बुधवार को बाल चिकित्सालय लाया गया। उसे खून चढ़ाने के लिए पलंग नहीं मिल सका। पिता धर्मेंद्र कुमार ने बताया वे हर महीने यहां खून चढ़वाने आते हैं। हर बार पट्टी पर लेटा दिया जाता है। पलाश से आई चार साल की बच्ची पपीता को भी एनीमिया के चलते खून चढ़ाना था। उसका इलाज भी पट्टी पर ही किया। पिता राणजी आदिवासी ने बताया पट्टी से गिरने का डर भी रहता है।
जगह ही नहीं, क्या करें
^अस्पताल में 80 पलंग हैं। 150 मरीज रहे हैं। ऐसे में सभी को पलंग नहीं मिल सकते। हमने 10 अतिरिक्त पलंग भी लगा रखे हैं। रात में किसी को बाहर नहीं सुलाया जाता। डॉक्टर की देख-रेख में कहीं भी खून चढ़ाया जा सकता है। डॉ.आर.सी. डामोर, प्रभारीबाल चिकित्सालय रतलाम
दानदाताओं से करेंगे मांग
^हमारे पास पलंग कम हैं। दानदाताओं से संपर्क करेंगे या रोगी कल्याण समिति के माध्यम से खरीदी करेंगे। फिलहाल वार्ड में ही जमीन पर बेडशीट देकर इलाज दिया जाएगा। अभिभावक