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नए सिरे से तैयार होगी मनरेगा की ऑडिट रिपोर्ट

7 वर्ष पहले
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जिलेमें महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की ऑडिट रिपोर्ट नए सिरे से तैयार होगी। कलेक्टर की मॉनीटरिंग के कारण पहले की रिपोर्ट में बदलाव का फैसला लिया गया।

जिले में 418 ग्राम पंचायत हैं। इनमें जिला पंचायत के जरिए केंद्र राज्य सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन होता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) लागू है। इसके क्रियान्वयन राशि के सही उपयोग की मॉनीटरिंग के लिए जिपं ने मनरेगा स्कीम का ऑडिट शुरू किया। कई सालों से ग्रापं स्तर पर चली ऑडिट प्रक्रिया में इस बार कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने मॉनीटरिंग शुरू की तो कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

सीईओ हरजिंदर सिंह के साइन के बाद जिपं ने ग्राम पंचायतों की ऑडिट रिपोर्ट मंगलवार को कलेक्टर के समक्ष पेश की। शुरुआती रिपोर्ट देखने पर कलेक्टर को ग्रापं स्तर पर गड़बड़ी दिखाई दी। उन्होंने ग्रापं सरपंच सचिवों के खिलाफ कार्रवाई का संकेत देते हुए डिटेल ऑडिट रिपोर्ट मांगी। इस पर जिपं के अफसर सकते में गए।

उन्होंने 418 ग्राम पंचायतों की मनरेगा की ऑडिट रिपोर्ट नए सिरे से डिटेल में तैयार कराने का निर्णय लिया। यह पूर्व में किए आकलन के आधार पर तैयार होगी।

रिपोर्ट में ये खामी

जिपंहर ग्राम पंचायत में मनरेगा की ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने के लिए ऑडिटर या एजेंसी को 25 रु. का भुगतान करती है। यह राशि हर क्वार्टर के लिए होती है। एजेंसी ने ऑडिट रिपोर्ट तैयार की। इसमें गड़बड़ी अन्य जानकारी भी दर्ज की लेकिन डिटेलिंग नहीं की। इसके विपरीत ग्राम पंचायत के सरपंच सचिवों पर कार्रवाई के लिए ऑडिट रिपोर्ट में डिटेल ब्योरा होना चाहिए। यही कारण है जिला पंचायत ने ऑडिट रिपोर्ट को डिटेल में नए सिरे से तैयार कराने का निर्णय लिया।

गड़बड़ीमिलने पर डिटेल रिपोर्ट मांगी

^ग्रामपंचायतों में मनरेगा की ऑडिट रिपोर्ट में गड़बड़ी दिखाई दी। कार्रवाई के लिए डिटेल रिपोर्ट मांगी तो जिपं ने इसे तैयार कर जल्द उपलब्ध कराने की बात कही है। डिटेल ऑडिट रिपोर्ट देखने के बाद संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। डॉ.संजय गोयल, कलेक्टर