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निमोनिया-मलेरिया की गिरफ्त में बच्चे

7 वर्ष पहले
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रतलाम. ठंड ने बच्चों की परेशानी बढ़ा दी है। बाल चिकित्सालय में निमोनिया मलेरिया पीडितों की संख्या बढ़ गई है। रोज 30-40 बच्चे निमोनिया मलेरिया पीड़ित रहे हैं।

मौसम बदलने के साथ सर्दी-जुकाम ने बच्चों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इसके साथ निमोनिया ने भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। सात दिन में बाल चिकित्सालय में 200 से अधिक मरीज निमोनिया मलेरिया के भर्ती हुए हैं। ठंड में मलेरिया का प्रभाव कम हो जाता है लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुआ।

बाल चिकित्सालय प्रभारी डाॅ. आर. सी. डामोर ने बताया ठंड में सामान्यत: निमोनिया के मरीजों में वृद्धि होती है। बच्चों को ठंड से नहीं बचाना, दूषित खान-पान, सर्दी-जुकाम का समय पर उपचार नहीं करवाना मुख्य कारण है। निमोनिया घातक बीमारी है। अगर समय पर उपचार नहीं करवाया जाए तो बच्चों की जान भी जा सकती है। ठंड निमोनिया के वायरस न्यूमोकॉकस के लिए अनुकूल होती है। सर्दी-जुकाम का समय पर इलाज नहीं करवाने से बच्चों को निमोनिया हो जाता है।

सर्दी-खांसीके बाद निमोनिया-श्यामाबाई पिताकन्हैयालाल निवासी सैलाना ने बताया तीन माह के बेटे संतोष को सप्ताहभर से खांसी रही थी। गांव के अस्पताल में दिखाया लेकिन फायदा नहीं हुआ। पसली चलने पर बाल-चिकित्सालय लेकर आई तो डॉक्टर ने निमोनिया बताया। फिरहुआ मलेरिया-भूरीबाई पतिरमेशचंद निवासी बाजना ने बताया 11 माह के बेटे आयुष को थोड़े दिन पहले मलेरिया हुआ था। इलाज के बाद ठीक हो गया। चार दिन बाद फिर बुखार आया। जांच में मलेरिया निकला। उसे भर्ती किया है।

मलेरिया का प्रकोप भी, ये हैं लक्षण

डॉ.सीमा चौधरी ने बताया ज्यादा समय तक सर्दी-जुकाम बने रहने से फेफड़ों मे सूजन जाती है। शिशु कुछ खा-पी नहीं पाता। तेज बुखार आता है और पसलियां चलने लगती हैं। यह बीमारी ज्यादातर 1 से 5 साल के बच्चों को चपेट में लेती है। अस्पताल आने वाले मरीजों में 80 प्रतिशत बच्चे सर्दी-जुकाम के रहे हैं। इनमें से 20 प्रतिशत निमोनिया पीड़ित हैं।

डॉ. प्रमोद झारे ने बताया आमतौर पर ठंड बढ़ने से मलेरिया रोगियों में कमी आती है। इस साल ओपीडी में आने वाले मरीजों में 30 प्रतिशत मरीज मलेरिया पीड़ित हैं। ये ग्रामीण क्षेत्रों से रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में झाडिय़ां और पेड़-पौधे ज्यादा होते हैं। नमी के कारण मच्छर ज्यादा पनपते हैं।